संभल। जनपद में जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने यह साबित कर दिया कि जब प्रशासन संवेदनशील हो, तो छोटी से छोटी आवाज भी बड़े बदलाव का कारण बन सकती है। चंदौसी की गणेश कॉलोनी में रहने वाली दो मासूम बहनों की 15 वर्षों से चली आ रही समस्या को डीएम ने सिर्फ 24 घंटे में हल कर एक मिसाल कायम कर दी।
गणेश कॉलोनी, गुलडहरा रोड स्थित सरकारी ट्यूबवेल के पास रहने वाली बच्चियों ने अपनी पीड़ा को शब्दों में नहीं, बल्कि 29 सेकेंड के एक मासूम वीडियो संदेश के जरिए जिलाधिकारी तक पहुंचाया। वीडियो में बच्चियों ने हाथ जोड़कर कहा—
“डीएम अंकल, हमारे घर के ऊपर से जा रहे ये तार हटवा दीजिए। ये लाइन 15 साल से बंद है, लेकिन इसी की वजह से हम अपना घर ऊपर नहीं बनवा पा रहे हैं।”
जैसे ही यह वीडियो जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया के संज्ञान में आया, उन्होंने इसे औपचारिक शिकायत नहीं, बल्कि जनता की पीड़ा मानते हुए तुरंत कार्रवाई की। डीएम ने बिना किसी देरी के बिजली विभाग को मौके पर भेजने और लाइन हटवाने के निर्देश दिए।
उनके निर्देशों का असर यह रहा कि विभागीय टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर वर्षों से बंद पड़ी विद्युत लाइन को हटवा दिया।
जिस समस्या के समाधान के लिए परिवार वर्षों से भटकता रहा, वह डीएम राजेंद्र पैंसिया की संवेदनशील सोच और त्वरित निर्णय क्षमता के चलते महज 24 घंटे में समाप्त हो गई। समस्या के समाधान के बाद बच्चियों ने एक और वीडियो बनाकर भावुक स्वर में कहा—
“थैंक यू डीएम अंकल”
इस पूरे घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी डीएम की कार्यशैली की जमकर सराहना हो रही है। लोग इसे मानवीय प्रशासन, डिजिटल संवाद और सुशासन का बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं।
डॉ. राजेंद्र पैंसिया उन जिलाधिकारियों में गिने जा रहे हैं, जो समस्याओं को फाइलों में दबाने के बजाय तुरंत समाधान पर विश्वास रखते हैं। बच्चों की मासूम अपील पर त्वरित कार्रवाई कर उन्होंने यह संदेश दिया कि प्रशासन सिर्फ आदेश देने के लिए नहीं, सुनने और समझने के लिए भी होता है।
संभल जनपद में डीएम राजेंद्र पैंसिया की यह पहल उन्हें एक संवेदनशील, जनहितैषी और जवाबदेह अधिकारी के रूप में और मजबूत पहचान दिला रही है।


