फर्रुखाबाद। इटावा-बरेली हाईवे पर स्थित जिले का सबसे महत्वपूर्ण पांचाल घाट पुल एक बार फिर सवालों के घेरे में है। वर्षों से इस पुल पर मरम्मत का सिलसिला जारी है, लेकिन हालात ऐसे हैं कि हर गुजरने वाला वाहन चालक और राहगीर खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद पुल की खामियां बार-बार सामने आना न केवल निर्माण एजेंसियों की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि पुल पर कई बार मरम्मत कार्य कराया गया, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं निकला। मरम्मत के दौरान लगे लंबे जाम ने आम जनता को भारी परेशानियों में डाला। लोगों के जेहन में आज भी वह दर्दनाक मंजर ताजा है, जब जाम में फंसी एक एंबुलेंस में मां और मासूम बच्ची ने दम तोड़ दिया था। इसके बावजूद व्यवस्था से जुड़े जिम्मेदार लोगों ने कोई ठोस सबक नहीं लिया।
जनता पूछ रही है कि आखिर बार-बार मरम्मत के बाद भी पुल की हालत क्यों नहीं सुधर रही? क्या मरम्मत कार्य में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई? क्या निर्माण सामग्री और तकनीकी गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए? यदि हर कुछ समय बाद पुल को फिर से मरम्मत की जरूरत पड़ रही है, तो अब तक हुए कार्यों की निष्पक्ष जांच क्यों नहीं कराई गई?
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि जिले में चार विधायक, एक सांसद और तमाम जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी के बावजूद फर्रुखाबाद की जीवनरेखा माने जाने वाले इस पुल की समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं हो सका। जनता का कहना है कि यदि जिले का सबसे महत्वपूर्ण पुल ही सुरक्षित और सुचारु नहीं रह सकता, तो विकास के बड़े-बड़े दावे खोखले साबित होते हैं।
क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पांचाल घाट पुल की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर इसके समानांतर एक नए पुल के निर्माण की स्वीकृति दी जाए। लोगों का कहना है कि जब तक स्थायी समाधान नहीं निकलेगा, तब तक यह पुल हजारों यात्रियों के लिए खतरे की घंटी बना रहेगा और किसी बड़े हादसे की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।


