फर्रुखाबाद/कन्नौज। तिर्वा राजघराने की करोड़ों रुपये मूल्य की बेशकीमती जमीनों को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। राजघराने की छोटी रानी सुनीता सिंह ने आरोप लगाया है कि पारिवारिक विवाद और प्रशासनिक लापरवाही का फायदा उठाकर भू-माफिया गिरोह तथा प्रभावशाली लोगों ने फतेहगढ़ सहित विभिन्न क्षेत्रों में स्थित बहुमूल्य संपत्तियों पर कब्जा जमा लिया। मामले को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है।
बताया जा रहा है कि फतेहगढ़ स्थित वह संपत्ति, जहां कभी चकबंदी कार्यालय संचालित होता था, अब विवादों के केंद्र में है। आरोप है कि बड़े राजा और छोटे राजा के परिवार के बीच लंबे समय से चले आ रहे संपत्ति विवाद का लाभ उठाकर कई प्रभावशाली लोगों ने राजघराने की जमीनों पर कब्जा कर लिया। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि करोड़ों रुपये कीमत वाली जमीनें बेहद कम कीमतों पर हाथ बदलती चली गईं।
रानी सुनीता सिंह का आरोप है कि बिना विधिवत बंटवारे के राजघराने की जमीनों की बिक्री और हस्तांतरण कैसे हुआ, इसकी उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने बड़े राजा की ओर से जारी की गई पावर ऑफ अटॉर्नी की वैधता और उसके आधार पर हुए भूमि सौदों की भी जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि संपत्ति का विधिक बंटवारा ही नहीं हुआ था, तो फिर बिक्री के अधिकार किस आधार पर दिए गए।
मामले में बांदा जेल में बंद पूर्व विधायक विजय सिंह के सिंडीकेट का नाम भी चर्चाओं में है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि वर्षों तक इस नेटवर्क का प्रभाव भूमि सौदों और कब्जों में बना रहा। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
राजनीतिक रूप से भी यह मामला अहम माना जा रहा है। रानी सुनीता सिंह के पुत्र द्वारा तिर्वा विधानसभा क्षेत्र से राजनीतिक दावेदारी की चर्चा के बीच निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री का भी समर्थन मिलने की बातें सामने आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार पुराने भूमि अभिलेखों और राजस्व रिकॉर्ड खंगालने की तैयारी की जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर करोड़ों रुपये की राजघराने की संपत्तियां किन परिस्थितियों में निजी हाथों में पहुंचीं, किन अधिकारियों ने इन सौदों को मंजूरी दी और क्या भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया कानून सम्मत थी। यदि पुराने रिकॉर्डों की गहन जांच होती है तो कई बड़े नामों के सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब निगाहें प्रदेश सरकार और राजस्व विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि रानी सुनीता सिंह की मांग पर जांच बैठती है तो दशकों पुराने भूमि सौदों, पावर ऑफ अटॉर्नी और कब्जों की परतें खुल सकती हैं तथा राजघराने की संपत्तियों से जुड़े कई अनसुलझे सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं।


