तेहरान/वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसने अमेरिका द्वारा किए गए हमलों के जवाब में क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। दावा किया गया है कि बहरीन में तैनात अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े और जॉर्डन स्थित एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ड्रोन तथा अन्य माध्यमों से हमला किया गया।
आईआरजीसी ने एक बयान में कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ “झूठे बहानों” के आधार पर सैन्य कार्रवाई की थी, जिसका जवाब देना आवश्यक था। ईरानी सैन्य नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी आक्रामकता जारी रहती है तो और कड़े कदम उठाए जाएंगे।
दूसरी ओर अमेरिका पहले ही ईरान के भीतर कई रणनीतिक ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई कर चुका है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि उसकी कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता की रक्षा के लिए की गई है। हालांकि ईरान ने इन दावों को खारिज करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है।
मिडिल ईस्ट में तेजी से बदलते घटनाक्रम के बीच वैश्विक शक्तियों की चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव और बढ़ता है तो इसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा, तेल आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से किए गए हमलों और नुकसान के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक प्रयास तनाव को कम कर पाएंगे या फिर यह टकराव किसी बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का रूप लेगा।


