– 110 से अधिक प्रतिष्ठानों में चंद पास एनओसी
– कई होटल मालिक राजनीतिक रसूख के चलते चला रहे काम
– शहर के कई नामी होटल बन रहे अवैध कामों का अड्डा
– जीएसटी चोरी की आड़, नहीं काटते बिल
– बिना आईडी मोटा चार्ज ले दे देते कमरे,होने लगी खुलेआम जिस्म फिरोशी
फर्रुखाबाद। जिले में संचालित हो रहे होटल, लॉज और गेस्ट हाउसों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर शासन नें चिंता व्यक्त की हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जनपद में 110 से अधिक होटल और लॉज संचालित हैं, लेकिन बीते पांच वर्षों में चंद प्रतिष्ठानों ने ही अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी ) प्राप्त किया है। कई होटलों में जीएसटी चोरी के चलते बिना बिल अच्छा पैसा लेकर कमरा दे दिए जाते, आई डी लेना भी यहाँ जरुरी नहीं जिससे अब खुलेआम जिस्मफरोशी भी आम बात हो गई है होटल संचालक अपने यहां सरकार के मंत्रियों का कार्यक्रम लगवा कर पुलिस पर रोब झाड़ते,जिससे खाकी की छापेमारी भी पूरी तरह बंद हो जाने का फायदा लेकर मनमानी चरम पर है।
जानकारी के मुताबिक जिले के अधिकांश होटल बिना फायर एनओसी के संचालित हो रहे हैं। चिंताजनक बात यह है कि जिन होटलों ने एनओसी प्राप्त की है, वहां भी पार्किंग जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वहीं शेष होटल और लॉज बिना आवश्यक अग्नि सुरक्षा स्वीकृति के कारोबार चला रहे हैं।
शहर के कई होटल घनी आबादी वाले क्षेत्रों और संकरी गलियों में स्थित हैं, जहां किसी आपात स्थिति में दमकल विभाग की गाड़ियों का पहुंचना भी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। ऐसे में आग लगने जैसी घटना होने पर राहत एवं बचाव कार्य प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
हाल ही में प्रशासन और अग्निशमन विभाग ने ऐसे प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करते हुए कुछ होटल संचालकों को नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन करने, आवश्यक उपकरण लगाने तथा नियमानुसार एनओसी प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली, नोएडा और अन्य शहरों में हुई अग्निकांड की घटनाओं से सबक लेते हुए फर्रुखाबाद में भी व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट कराया जाना चाहिए। होटल, बैंक्वेट हॉल और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकास मार्ग, जल स्रोत और सुरक्षा मानकों की नियमित जांच आवश्यक है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को केवल नोटिस जारी करने तक सीमित न रहकर नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना को रोका जा सके।


