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Monday, May 25, 2026

इंदिरापुरम में फूटा फ्लैट खरीदारों का गुस्सा

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– ‘सपनों का घर’ बना मुसीबत का टावर, टीएंडटी बिल्डर पर गंभीर आरोप

यूथ इंडिया | गाजियाबाद। इंदिरापुरम स्थित टी एंड टी ग्रुप के चर्चित प्रोजेक्ट ऐगिस ट्रिने टावर्स में रहने वाले सैकड़ों परिवार शनिवार को सड़क पर उतर आए। हाथों में पोस्टर और नारों के साथ प्रदर्शन कर रहे निवासियों ने बिल्डर पर वादाखिलाफी, बुनियादी सुविधाएं न देने, जबरन वसूली और डराने-धमकाने जैसे गंभीर आरोप लगाए। करोड़ों रुपये खर्च कर फ्लैट खरीदने वाले लोगों का कहना है कि उन्हें सुविधाओं के नाम पर सिर्फ आश्वासन मिले, जबकि हकीकत में वे अव्यवस्था और असुरक्षा के बीच रहने को मजबूर हैं।

दिसंबर 2023 में देना था कब्जा, आज तक अधूरा प्रोजेक्ट

निवासियों के मुताबिक बायर्स एग्रीमेंट (बीबीए ) में प्रोजेक्ट की पूर्णता तिथि 28 दिसंबर 2023 तय की गई थी। तय समय गुजर जाने के बाद भी निर्माण कार्य पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। सबसे बड़ा आरोप यह है कि बिल्डर अब तक ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी ) और कंप्लीशन सर्टिफिकेट (सीसी ) प्राप्त नहीं कर सका, बावजूद इसके लगभग 500 परिवारों को फ्लैटों में शिफ्ट करा दिया गया। लोगों का कहना है कि बिना वैधानिक मंजूरी के रहना उनकी सुरक्षा से सीधा खिलवाड़ है।

एक ही रास्ते से एंट्री-एग्जिट, हादसे का बना खतरा

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि फ्लैट बुकिंग के दौरान बिल्डर ने इंदिरापुरम की ओर से अलग मुख्य एंट्री और एग्जिट रूट देने का दावा किया था, लेकिन पजेशन के समय यह वादा बदल दिया गया। वर्तमान में पूरी सोसाइटी के लिए सिर्फ एक ही रास्ता है, जो प्रवेश और निकास दोनों के लिए इस्तेमाल हो रहा है। यही नहीं, मुख्य गेट के पास बड़े गड्ढे की वजह से हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
सोसाइटी के लोगों ने बिजली व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि बिल्डर ने नया बैकअप सिस्टम लगाने के बजाय पुराना डीजी सेट लगाया है, जिसके कारण दिनभर में 20 से अधिक बार बिजली ट्रिप होती है। इससे वर्क-फ्रॉम-होम करने वाले लोग, स्कूली बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
हर टावर में सिर्फ तीन लिफ्ट होने के कारण सुबह और शाम लंबी कतारें लग रही हैं। कई बार तकनीकी खराबी के चलते लोगों को सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ता है। वहीं पार्किंग व्यवस्था भी गंभीर संकट बनी हुई है। निवासियों का कहना है कि पर्याप्त पार्किंग न होने के कारण आए दिन विवाद और कहासुनी की स्थिति बनती है।
निवासियों ने आरोप लगाया कि सोसाइटी में सप्लाई हो रहे पानी का टीडीएस स्तर 900 से अधिक है, जो स्वास्थ्य मानकों के लिहाज से बेहद चिंताजनक है। लोगों का कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं, लेकिन बिल्डर इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं ले रहा।
फ्लैट खरीदते समय दिखाई गई सुविधाओं पर भी सवाल खड़े किए गए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बीबीए में पार्क, क्लब हाउस, बच्चों के खेलने की जगह और अन्य आधुनिक सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर इनमें से कुछ भी मौजूद नहीं है।
सोसाइटी के लोगों का आरोप है कि एग्रीमेंट के मुताबिक ओसी और सीसी मिलने के बाद ही मेंटेनेंस शुल्क लागू होना था। इसके बावजूद बिल्डर जबरन चार्ज वसूलने का दबाव बना रहा है। विरोध करने वाले निवासियों को कथित तौर पर प्रबंधन की ओर से धमकियां भी दी जा रही हैं।
निवासियों ने बताया कि वे अपनी शिकायतें उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण और जिला प्रशासन को लिखित रूप में सौंप चुके हैं। लेकिन अब तक किसी भी एजेंसी की ओर से बिल्डर के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे लोगों में भारी नाराजगी है।
प्रदर्शन कर रहे निवासियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्याओं का समाधान नहीं हुआ और बिल्डर की मनमानी पर रोक नहीं लगी, तो आंदोलन को और व्यापक और उग्र रूप दिया जाएगा।

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