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Thursday, May 7, 2026

सरकारी नौकरी, निजी अस्पताल पर फोकस! लोहिया अस्पताल के बेहोशी विशेषज्ञ पर गंभीर सवाल, मरीजों की जान से खिलवाड़ के आरोप

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क्रासर
समझ नहीं होते हस्ताक्षर रजिस्टर पर साइन
कॉल करने पर आगरा से आकर मरीजों को देते हैं बेहोशी
फर्रुखाबाद। योगी आदित्यनाथ जहां एक ओर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर डॉ राम मनोहर लोहिया चिकित्सालय में तैनात बेहोशी विशेषज्ञ डॉक्टर अमिताभ चौहान की कार्यशैली स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रही है। आरोप है कि सरकारी अस्पताल में तैनाती के बावजूद डॉक्टर अधिक समय आगरा स्थित अपने निजी नर्सिंग होम को देने में व्यस्त रहते हैं, जबकि अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान उनकी मौजूदगी आवश्यक होती है।
सूत्रों के अनुसार लोहिया अस्पताल में होने वाले कई ऑपरेशन ऐसे समय किए जा रहे हैं जब बेहोशी विशेषज्ञ डॉक्टर अमिताभ चौहान अस्पताल में मौजूद नहीं रहते। ऐसी स्थिति में मजबूरीवश महिला अस्पताल में तैनात बेहोशी विशेषज्ञ डॉक्टर ओमप्रकाश को बुलाकर पुरुष अस्पताल में ऑपरेशन कराए जा रहे हैं। इससे न केवल अस्पताल की व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं बल्कि मरीजों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अस्पताल सूत्रों की मानें तो पिछले चार दिनों से डॉक्टर अमिताभ चौहान के हस्ताक्षर तक अस्पताल के उपस्थिति रजिस्टर में दर्ज नहीं मिले। इससे यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर बिना नियमित उपस्थिति के सरकारी कार्य कैसे संचालित हो रहा है। कर्मचारियों और मरीजों के तीमारदारों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर काफी नाराजगी दिखाई दे रही है।
जब अस्पताल के कुछ चिकित्सकों से इस विषय में जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो उन्होंने खुलकर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। अधिकांश चिकित्सकों ने मामला मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के अधिकार क्षेत्र का बताते हुए टिप्पणी करने से बचना ही उचित समझा। हालांकि अंदरखाने अस्पताल में डॉक्टर अमिताभ चौहान की अनुपस्थिति को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
बताया जा रहा है कि डॉक्टर अमिताभ चौहान का निजी नर्सिंग होम संचालित है और वह अधिकतर समय वहीं व्यस्त रहते हैं। आरोप यहां तक लगाए जा रहे हैं कि अस्पताल में जरूरत पड़ने पर फोन करने के बाद ही वह फर्रुखाबाद पहुंचते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि किसी गंभीर मरीज को तत्काल ऑपरेशन की आवश्यकता पड़ जाए तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।
मरीजों के परिजनों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में गरीब और असहाय लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं। यदि वहां भी डॉक्टर समय पर उपलब्ध न हों तो मरीजों की जिंदगी भगवान भरोसे ही रह जाती है। लोगों का कहना है कि सरकार द्वारा लाखों रुपये वेतन दिए जाने के बावजूद यदि डॉक्टर निजी अस्पतालों को प्राथमिकता देंगे तो सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति कैसे सुधरेगी।
इस पूरे मामले पर जब मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर जगमोहन शर्मा से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि यदि डॉक्टर अमिताभ चौहान अवकाश पर रहते हैं तो महिला अस्पताल से बेहोशी विशेषज्ञ डॉक्टर ओमप्रकाश को बुलाया जाता है। फिलहाल डॉक्टर अमिताभ चौहान छुट्टी पर बताए गए हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका कि लगातार कई दिनों से उनकी अनुपस्थिति की सूचना उच्च अधिकारियों को दी गई थी या नहीं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या स्वास्थ्य विभाग इस मामले की निष्पक्ष जांच कराएगा या फिर मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा। आम जनता और मरीजों के तीमारदारों ने शासन से पूरे मामले की जांच कर संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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