– राजस्व कर्मियों से साज कर पाट लिया सरकारी तालाब
– ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद भी अवैध प्लाटिंग बदस्तूर जारी
– खुलेआम बगैर नक्शा पास कराए बन रहे मकान
– न्यायालय के स्टे के बाद भी हो रहे बैनामे, खुली अवमानना
फर्रुखाबाद। जिले में अपराध और सत्ता के गठजोड़ की नई सनसनीखेज परत सामने आई है। कुख्यात माफिया अनुपम दुबे भले ही जेल में बंद हो, लेकिन उसका नेटवर्क आज भी खुलेआम जमीनों पर कब्जा, अवैध प्लॉटिंग और करोड़ों के खेल को संचालित कर रहा है। एक करीबी सदस्य के खुलासे ने पूरे सिस्टम को हिला दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, गैंग की फंडिंग आज भी धंसुआ क्षेत्र से जारी है, जहां फतेहगढ़ की धंसुआ कोतवाली इलाके में माफिया का सबसे मजबूत नेटवर्क सक्रिय बताया जा रहा है। आरोप है कि माफिया के संरक्षक अनिल उर्फ चंदू ने अपने समधी तेल माफिया पवन कटियार और पंकज कटियार (पुत्र भानु प्रताप सिंह, निवासी राजीव गांधी नगर, फर्रुखाबाद) के साथ मिलकर आवास विकास कॉलोनी से सटी जमीन, नेकपुर कला में सरकारी तालाब पर कब्जा कर उसे पाट दिया और बिना किसी वैध लेआउट पास कराए अवैध प्लॉटिंग शुरू कर दी।
हैरानी की बात यह है कि इस पूरे अवैध खेल पर पहले भी प्रशासन ने कार्रवाई की थी। तत्कालीन नगर मजिस्ट्रेट संजय बंसल ने मौके पर पहुंचकर ध्वस्तीकरण कराया था, लेकिन इसके बावजूद माफिया नेटवर्क ने दोबारा कब्जा कर अवैध निर्माण और प्लॉटिंग जारी रखी। आज भी बिना नक्शा पास कराए खुलेआम मकान बनाए जा रहे हैं और जिम्मेदार मौन है। सिर्फ इतना ही नहीं न्यायालय में स्थगन आदेश पारित रहते और मुकदमा विचाराधीन होने के बावजूद खुलेआम बैनामा भी हो रहे हैं।
इस पूरे मामले का बड़ा खुलासा गैंग के सदस्य कौशल सिंह यादव (नीबलपुर निवासी) ने किया है। कार्रवाई की आशंका के बीच उसने कई नाम उजागर किए हैं। आरोप है कि इस खेल में एक सजायाफ्ता पूर्व विधायक के भतीजे के साथ-साथ भाजपा से जुड़े दो कथित व्यवसायी नेता भी शामिल हैं। सामने आए नामों में भाजपा नेता प्रवीण उर्फ शंकर सिंह और करन सिंह (पूर्व विधायक के भतीजे) का भी जिक्र है। हालांकि, इन आरोपों पर उनका पक्ष नहीं मिल सका।
खुलासे यहीं नहीं रुके बताया गया कि तेल माफिया पवन और उसके समधी ने माफिया संग काली कमाई के जरिए इटावा-बरेली हाईवे पर करीब 10 करोड़ रुपये की जमीन का एक साथ बैनामा अपनी अपनी पत्नियों के नाम कराया, जिसमें बड़े स्तर पर सरकारी राजस्व की चोरी और आयकर विभाग को चूना लगाने का आरोप है।
इस गैंग के कारनामे पहले भी सामने आ चुके हैं। रोशनाबाद (थाना शमशाबाद) स्थित अवैध पेट्रोल पंप पर प्रशासनिक छापेमारी में चौंकाने वाला खेल पकड़ा गया था—पेट्रोल लाइसेंस के बिना ज्वलनशील पदार्थ बेचना, बायोडीजल के नाम पर सामान्य डीजल की कालाबाजारी। जिला प्रशासन ने पंप सील कर मुकदमा दर्ज किया था, और विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट भी आ चुकी है। बावजूद इसके, आरोप है कि माफिया तंत्र ने दबाव बनाकर आगे की कार्रवाई रुकवा दी।
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि हाल ही में पूर्व विधायक के घर हुए बम धमाके में भी इसी नेटवर्क से जुड़े कुछ अहम सुराग सामने आ सकते हैं, जो इस पूरे सिंडिकेट को और गहराई से उजागर कर सकते हैं।
यह मामला सिर्फ अवैध प्लॉटिंग या फ्यूल घोटाले तक सीमित नहीं है यह उत्तर प्रदेश में अपराध, राजनीति और प्रशासनिक ढिलाई के खतरनाक गठजोड़ की तस्वीर पेश करता है।
यूथ इंडिया की पड़ताल जारी है क्योंकि सवाल सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि उस सिस्टम का है जहां जेल की सलाखों के पीछे बैठा माफियातंत्र बाहर अपना पूरा साम्राज्य चला रहा है। बहुत जल्दी सभी सफेदपोश के नाम भी फोटो सहित उजागर होंगे जो वर्तमान सत्तारुण पार्टी में शामिल रहते हुए भी सरकार के चेहरे पर अपने काले कारनामो से कालिख पोत रहे हैं।
जेल में बंद, बाहर चलता साम्राज्य: फर्रुखाबाद में अनुपम दुबे गैंग का ‘भूमाफिया सिंडिकेट’ बेनकाब, सरकारी तालाब से करोड़ों की जमीन तक खेल!


