लखनऊ। महोना इलाके से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां कथित “किराए की कोख” के नाम पर नवजात बच्चों की सौदेबाजी का बड़ा खेल उजागर हुआ है। आरोपों के केंद्र में सहारा वेल केयर हॉस्पिटल है, जिस पर गंभीर अनियमितताओं और अवैध गतिविधियों के आरोप लगे हैं।
मामले ने तब तूल पकड़ा जब एक वायरल वीडियो सामने आया, जिसमें दलालों के बीच नवजात बच्चे की खरीद-फरोख्त को लेकर खुलेआम बातचीत होती दिख रही है। वीडियो में कथित तौर पर “रेट” तय करने और डील फाइनल करने जैसी बातें सुनाई दे रही हैं, जिसने पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल को नोटिस जारी कर दिया है और 2 दिन के भीतर जवाब तलब किया गया है। स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम अब पूरे प्रकरण की जांच में जुट गई है।
सूत्रों के अनुसार, जांच के दायरे में केवल अवैध सरोगेसी या बच्चा बिक्री ही नहीं, बल्कि अस्पताल की जमीन की वैधता भी आ गई है। प्राथमिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि अस्पताल जिस जमीन पर संचालित हो रहा है, उसकी कानूनी स्थिति भी संदिग्ध हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में सरोगेसी को लेकर सख्त कानून लागू हैं, जिनके तहत व्यावसायिक सरोगेसी पूरी तरह प्रतिबंधित है। ऐसे में अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न सिर्फ आपराधिक कृत्य होगा बल्कि एक बड़े संगठित गिरोह की ओर इशारा करेगा।
यह मामला सिर्फ एक अस्पताल या कुछ दलालों तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि इसमें एक पूरे नेटवर्क के सक्रिय होने की आशंका जताई जा रही है—जहां गरीब महिलाओं की मजबूरी और नवजात बच्चों की जिंदगी को पैसे के लिए दांव पर लगाया जा रहा है।
अब बड़ा सवाल यही है—क्या प्रशासन इस रैकेट की जड़ तक पहुंचेगा या फिर यह मामला भी कुछ दिनों की सुर्खियों के बाद ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
“किराए की कोख” रैकेट का सनसनीखेज खुलासा: महोना के अस्पताल पर नवजात की सौदेबाजी का आरोप, प्रशासन ने भेजा नोटिस!


