– राजस्व कर्मियों की खुलेआम मनमानी से कराह उठी जनता
फर्रुखाबाद। तहसील सदर में व्याप्त भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के खिलाफ अधिवक्ताओं का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। शनिवार को वरिष्ठ अधिवक्ता दयाशंकर तिवारी के चैंबर में आयोजित बैठक में वकीलों ने साफ चेतावनी दी यदि भ्रष्टाचार पर जल्द लगाम नहीं लगी तो अधिवक्ता आर-पार की लड़ाई लड़ने को मजबूर होंगे।
बैठक में मौजूद अधिवक्ताओं दयाशंकर तिवारी, अनुराग तिवारी, प्रवीन सक्सेना, अजय प्रताप सिंह, भानु प्रताप सिंह, पंकज राजपूत, महेंद्र प्रताप सिंह, रमेश यादव, रवनेश यादव, मंजेश कटियार, जनार्दन राजपूत, राजीव चौहान, प्रदीप सक्सेना, प्रघुम्न कुमार गुप्ता, प्रकाश द्विवेदी, जितेंद्र सक्सेना, मुन्ना यादव, गोविंद अवस्थी, संतोष सक्सेना, दिलीप सक्सेना, योगेश दीक्षित समेत अन्य अधिवक्ताओं ने एक स्वर में तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि तहसील सदर में न तो मामलों की नियमित सुनवाई हो रही है और न ही सुनवाई के बाद समय से आदेश पारित किए जा रहे हैं। कई मामलों में महीनों तक आदेश लंबित रखे जा रहे हैं, जिससे वादकारियों को सालों तक चक्कर काटने पड़ते हैं। सबसे गंभीर आरोप यह भी लगा कि न्यायालयों और कार्यालयों में बाहरी व अनाधिकृत लोग बैठकर काम कर रहे हैं, जो सीधे-सीधे सिस्टम की साख पर सवाल खड़ा करता है।
अधिवक्ता पंकज राजपूत ने कहा कि नियमों को दरकिनार कर मनमाने आदेश पारित किए जाते हैं और फिर वर्षों तक उनमें संशोधन नहीं होता, जिससे वकील और वादकारी दोनों परेशान हैं। उन्होंने साफ कहा—“हमने काला कोट न्याय की रक्षा के लिए पहना है, लेकिन यहां खुद अन्याय झेलना पड़ रहा है।”
वहीं, अनुराग तिवारी एडवोकेट ने कहा कि “तारीख पर तारीख” की परंपरा ने न्याय व्यवस्था को मजाक बना दिया है। अधिकारी और कर्मचारी मनमानी कर रहे हैं, और वादकारी बेबस होकर वर्षों तक न्याय के लिए भटक रहे हैं।
बैठक में यह भी बड़ा आरोप सामने आया कि तहसील बार एसोसिएशन की निष्क्रियता के चलते अधिकारी बेलगाम हो चुके हैं। अधिवक्ताओं ने इसे बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो बड़ा आंदोलन तय है।
वरिष्ठ अधिवक्ता दयाशंकर तिवारी ने बताया कि कायमगंज अधिवक्ता संघ द्वारा समर्थन मांगा गया है, जिस पर जल्द निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले दिनों में अधिवक्ता एकजुट होकर बड़ा कदम उठा सकते हैं।
इनसेट: ‘राम-भरत’ मिलाप से खत्म हुई खेमेबाजी, एकता का संदेश
बैठक के दौरान एक भावुक और सकारात्मक दृश्य भी सामने आया। लंबे समय से अलग-अलग गुटों में बंटे अधिवक्ता रवनेश चन्द्र यादव और जनार्दन राजपूत के बीच चल रहे मतभेद को वरिष्ठ अधिवक्ता दयाशंकर तिवारी ने खत्म करा दिया।
दर्जनों वकीलों की मौजूदगी में दोनों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर गले लगाया। इस ‘राम-भरत मिलाप’ पर मौजूद अधिवक्ताओं ने तालियां बजाकर स्वागत किया और साफ संदेश दिया कि अब लड़ाई सिस्टम से होगी, आपस में नहीं।


