एटा
जनपद के कोतवाली देहात क्षेत्र से मनरेगा मजदूरों के नाम पर बैंक खातों के जरिए धोखाधड़ी का गंभीर मामला सामने आया है, जिसने ग्रामीणों और प्रशासन दोनों को चौंका दिया है। आरोप है कि मजदूरों को सरकारी योजना का लाभ दिलाने का झांसा देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए गए और फिर उन्हीं खातों से अवैध लेनदेन कर रकम हड़प ली गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने बैंक मैनेजर, बिचौलिए अनुज जैन तथा अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोतवाली देहात क्षेत्र के ग्राम विदिरका निवासी सुशील कुमार ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि गांव के ही अतुल और जयवीर, जो गुजरात में मजदूरी करते हैं, को मनरेगा के तहत मिलने वाली मजदूरी सीधे खाते में भेजने का लालच दिया गया। इसी बहाने बिचौलिया अनुज जैन ने उन्हें बैंक ऑफ महाराष्ट्र की आगरा रोड चुंगी शाखा में खाते खुलवाने के लिए प्रेरित किया।
आरोप है कि खाते खुलवाने के दौरान तत्कालीन शाखा प्रबंधक की मिलीभगत से खातों में मजदूरों के बजाय अपने मोबाइल नंबर दर्ज करा दिए गए। इसके बाद उन्हीं नंबरों के माध्यम से यूपीआई आईडी बनाकर खातों से पैसे का अवैध लेनदेन किया गया। जब पीड़ितों को इस धोखाधड़ी की जानकारी हुई और वे खाते बंद कराने बैंक पहुंचे, तो वहां उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। बल्कि उनसे कहा गया कि खाता खुलवाने वाले व्यक्ति को साथ लेकर आएं, जिससे उनकी परेशानियां और बढ़ गईं।
पीड़ितों ने इस मामले की शिकायत पहले वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से भी की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई न होने पर अंततः उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। अदालत के निर्देश पर अब कोतवाली देहात पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया है और सभी आरोपियों की भूमिका की जांच शुरू कर दी गई है।
इस घटना ने बैंकिंग व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत पाए जाने पर कठोर कदम उठाए जाएंगे। वहीं, ग्रामीणों से भी अपील की गई है कि वे किसी भी योजना के नाम पर लालच में आकर अपनी बैंकिंग जानकारी साझा न करें और सतर्क रहें, ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।


