कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सियासत में चुनावी पारा चरम पर है और इसी बीच योगी आदित्यनाथ ने बुधवार जोरासांको विधानसभा क्षेत्र में आयोजित जनसभा में ऐसा सियासी बम फोड़ा, जिसने बंगाल की राजनीति में हलचल मचा दी है। योगी ने सीधे तौर पर कांग्रेस, वामपंथ और तृणमूल कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि “बंगाल, जो कभी देश की आर्थिक रीढ़ था, उसे साजिशन बर्बाद किया गया।”
योगी ने अपने संबोधन में ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि आज़ादी के समय भारत की अर्थव्यवस्था में बंगाल का योगदान सबसे ज्यादा था। उस दौर में देशभर के लोग रोजगार के लिए बंगाल आते थे। उद्योग, शिक्षा और शोध का केंद्र रहा यह प्रदेश अब “अंधकार और बेरोजगारी” में डूब चुका है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पहले कांग्रेस ने बंगाल को लूटा, फिर वामपंथी सरकारों ने उसे “नोच-नोचकर कमजोर किया” और पिछले 15 वर्षों में तृणमूल कांग्रेस के शासन में “गुंडाराज और भ्रष्टाचार” ने इसे पूरी तरह कंगाल बना दिया।
सभा में योगी ने “बुआ-भतीजा” शब्द का इस्तेमाल करते हुए टीएमसी नेतृत्व पर सीधा हमला बोला और कहा कि “ये लोग बंगाल के अस्तित्व को खत्म करने पर तुले हैं।” यह बयान सीधे तौर पर ममता बनर्जी और उनके करीबी राजनीतिक दायरे की ओर इशारा माना जा रहा है।
भाषाई और सांस्कृतिक मुद्दे को हवा देते हुए योगी ने कोलकाता के मेयर के कथित बयान पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “अगर कोई कहता है कि यहां उर्दू चलेगी, तो यह बंगाली अस्मिता के साथ खिलवाड़ है।” योगी ने मंच से ऐलान किया कि “बंगाल की पहचान किसी बाहरी प्रभाव से नहीं, बल्कि मां काली की आस्था से है।”
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, बंगाल में बेरोजगारी दर 2025-26 के दौरान राष्ट्रीय औसत (लगभग 7-8%) के आसपास बनी हुई है, जबकि औद्योगिक निवेश में गिरावट और पलायन जैसे मुद्दे लगातार उठते रहे हैं। योगी का यह बयान इन्हीं आंकड़ों को आधार बनाकर सियासी हमला माना जा रहा है।
इस जनसभा के बाद बंगाल की राजनीति में सांस्कृतिक पहचान बनाम राजनीतिक वर्चस्व की बहस और तेज हो गई है। भाजपा जहां “बंगाली अस्मिता” को चुनावी मुद्दा बना रही है, वहीं टीएमसी इसे “बाहरी हस्तक्षेप” बताकर पलटवार की तैयारी में है।
“कांग्रेस ने लूटा, वाम ने नोचा, अब टीएमसी ने बंगाल को कंगाल बना दिया”: योगी


