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Tuesday, June 9, 2026

भारतीय संस्कृति की पहचान है ढोलक, बच्चों को सिखाया जा रहा ताल-लय का ज्ञान

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फर्रुखाबाद ।भारतीय संस्कृति की पहचान मानी जाने वाली ढोलक को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए उत्तर प्रदेश नाटक अकादमी, लखनऊ, संस्कृति विभाग द्वारा ‘नाद प्रवाह’ के अंतर्गत ग्रीष्मकालीन ढोलक कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यशाला 25 मई से मदन मोहन कनौड़िया जूनियर कॉलेज, लोहाई रोड में संचालित हो रही है।

कार्यशाला की प्रशिक्षिका श्रीमती किरण त्रिवेदी ने कहा कि ढोलक हमारे शुभ अवसरों जैसे विवाह, मुंडन, मुंडनौतन आदि उत्सवों पर धूमधाम से बजाई जाती है। आज की युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का ढोलक एक प्रमुख साधन है।

बच्चों को इस कार्यशाला में अंगुलियों की गति, पहली थाप, दूसरी थाप, ताल कहरवा, दादरा ताल और बोलों का अभ्यास कराया जा रहा है। कहरवा ताल में 8 मात्रा के बोल – ध, गे, गा, गि, म, क, थि, की तथा दादरा ताल में 6 मात्रा के बोल – ध, धि, न, धा, तू, ना सिखाए जा रहे हैं।

कार्यशाला के आयोजन में अनुराग अग्रवाल, सुरेंद्र पांडेय, अरविंद दीक्षित, गौरव मिश्रा ‘बंटी’, कुलदीप शर्मा, अनुभव सारस्वत, कुलभूषण, रविंद्र भदौरिया, अनुराग पांडेय आदि व्यवस्था देख रहे हैं।

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