लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने आगामी विकास कार्यों, कानून-व्यवस्था की निगरानी और सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को ध्यान में रखते हुए जिलों के प्रभारी मंत्रियों की नई सूची जारी कर दी है। इस फेरबदल में कई नए मंत्रियों को पहली बार जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि कुछ वरिष्ठ मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में भी बदलाव किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना को राजधानी लखनऊ और प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी का प्रभारी मंत्री बनाया गया है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही को अयोध्या और बस्ती, जबकि जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को प्रयागराज और गोरखपुर की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सरकार ने हाल ही में मंत्रिमंडल में शामिल किए गए मंत्रियों को भी महत्वपूर्ण जिलों का प्रभार दिया है। मनोज कुमार पांडेय को सीतापुर, अजीत सिंह पाल को फतेहपुर, कृष्णा पासवान को कौशांबी, कैलाश सिंह राजपूत को एटा, सुरेंद्र दिलेर को बुलंदशहर तथा हंसराज विश्वकर्मा को सोनभद्र का प्रभारी मंत्री नियुक्त किया गया है।
इसी प्रकार बेबी रानी मौर्य को इटावा और हाथरस, लक्ष्मी नारायण चौधरी को अलीगढ़ और फिरोजाबाद, जबकि पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह को झांसी और फर्रुखाबाद का प्रभारी मंत्री बनाया गया है। फर्रुखाबाद जिले की जिम्मेदारी जयवीर सिंह को मिलने को प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके अलावा धर्मपाल सिंह को गाजियाबाद और रामपुर, अनिल राजभर को आजमगढ़ और सिद्धार्थनगर, राकेश सचान को रायबरेली और कन्नौज, तथा एके शर्मा को जौनपुर और भदोही का प्रभारी मंत्री बनाया गया है।
सरकार की ओर से जारी सूची के अनुसार भूपेंद्र सिंह चौधरी को आगरा और कासगंज, योगेंद्र उपाध्याय को कानपुर नगर, आशीष पटेल को गोंडा, ओम प्रकाश राजभर को अंबेडकरनगर, दारा सिंह चौहान को कुशीनगर और श्रावस्ती की जिम्मेदारी दी गई है।
वहीं सुनील शर्मा को सहारनपुर, अनिल कुमार को मुरादाबाद, असीम अरुण को हरदोई और मेरठ, जेपीएस राठौर को संभल और बरेली, जबकि दिनेश प्रताप सिंह को बांदा और बहराइच का प्रभारी मंत्री बनाया गया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार प्रभारी मंत्री अपने-अपने जिलों में विकास परियोजनाओं की समीक्षा, जन समस्याओं के समाधान, कानून-व्यवस्था की निगरानी तथा शासन की प्राथमिकताओं को धरातल पर लागू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। नई सूची को आगामी राजनीतिक और प्रशासनिक रणनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।


