जनता दर्शन से निकला सख्त संदेश: भूमि विवादों में अब नहीं चलेगी लापरवाही
उत्तर प्रदेश में भूमि विवाद लंबे समय से प्रशासनिक व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल रहे हैं। अवैध कब्जे, फर्जी बैनामे, राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी, पैमाइश में देरी और शिकायतों के निस्तारण में उदासीनता जैसी समस्याएं आम नागरिकों को वर्षों तक न्याय के लिए भटकने पर मजबूर करती रही हैं। ऐसे में गोरखपुर में आयोजित जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भूमि संबंधी शिकायतों पर अपनाया गया सख्त रुख प्रशासनिक तंत्र के लिए एक स्पष्ट चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा है कि भूमि मामलों के निस्तारण में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध निलंबन तक की कार्रवाई की जा सकती है। यह बयान केवल एक प्रशासनिक निर्देश नहीं बल्कि उस व्यापक समस्या को स्वीकार करने का संकेत है, जिसके कारण प्रदेश के हजारों परिवार वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
वास्तविकता यह है कि उत्तर प्रदेश के अधिकांश जिलों में तहसील और राजस्व विभाग भूमि विवादों का केंद्र बने हुए हैं। आम नागरिकों की शिकायत रहती है कि राजस्व कर्मियों की निष्क्रियता, स्थानीय प्रभावशाली लोगों की दखलंदाजी और भ्रष्टाचार के कारण वैध भूमिधर भी अपनी जमीन पर अधिकार नहीं प्राप्त कर पाते। कई मामलों में शिकायतें महीनों और वर्षों तक लंबित रहती हैं जबकि पीड़ित व्यक्ति न्याय की आस में अधिकारियों के चक्कर काटता रहता है।
गोरखपुर के जनता दर्शन में भी जब लोगों ने राजस्व कर्मियों की लापरवाही की शिकायत की तो मुख्यमंत्री ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। यह दर्शाता है कि सरकार अब केवल शिकायत सुनने तक सीमित नहीं रहना चाहती बल्कि जवाबदेही तय करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यदि यह नीति पूरे प्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू होती है तो भूमि विवादों के निस्तारण की प्रक्रिया में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।
जनता दर्शन का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा रहा। मुख्यमंत्री ने पात्र लोगों के आयुष्मान कार्ड बनवाने पर विशेष जोर दिया। यह एक ऐसा विषय है जो सीधे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की जिंदगी से जुड़ा हुआ है। आज भी बड़ी संख्या में पात्र लोग जानकारी के अभाव या प्रशासनिक उदासीनता के कारण आयुष्मान भारत योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। परिणामस्वरूप गंभीर बीमारी आने पर परिवार आर्थिक संकट में फंस जाते हैं।
मुख्यमंत्री द्वारा अधिकारियों को प्रत्येक पात्र व्यक्ति का आयुष्मान कार्ड बनवाने का निर्देश देना स्वागत योग्य कदम है। हालांकि सवाल यह भी है कि जब योजना वर्षों से संचालित है तो अब तक लाखों पात्र लोग इससे वंचित क्यों हैं? यदि निचले स्तर पर सर्वेक्षण और सत्यापन की प्रक्रिया प्रभावी होती तो जनता दर्शन में लोगों को आयुष्मान कार्ड के लिए मुख्यमंत्री के सामने गुहार लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
जनता दर्शन के दौरान एक महिला को उसके मकान पर कब्जा दिलाने का निर्देश और गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए विवेकाधीन कोष से सहायता का आश्वासन यह दर्शाता है कि मुख्यमंत्री व्यक्तिगत स्तर पर शिकायतों के समाधान को लेकर संवेदनशील हैं। लेकिन किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सफलता इस बात में नहीं है कि हर पीड़ित को मुख्यमंत्री तक पहुंचना पड़े, बल्कि इसमें है कि स्थानीय स्तर पर ही समस्याओं का समाधान समयबद्ध और निष्पक्ष ढंग से हो जाए।
आज आवश्यकता इस बात की है कि मुख्यमंत्री के निर्देश केवल बैठकों और फाइलों तक सीमित न रहें। तहसील, थाना और ब्लॉक स्तर पर अधिकारियों की जवाबदेही तय हो। भूमि विवादों के निस्तारण की नियमित निगरानी हो। अवैध कब्जाधारकों और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोहों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही आयुष्मान कार्ड जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएं।


