– पुणे एटीएस अधिकारी बनकर वीडियो कॉल
– जांच और गिरफ्तारी का डर दिखाया
– 22 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखकर ऐंठी रकम
लखनऊ। राजधानी में साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। मड़ियांव के फैजुल्लागंज निवासी 73 वर्षीय सेवानिवृत्त अधिकारी को साइबर ठगों ने कथित तौर पर पुणे एटीएस अधिकारी बनकर अपने जाल में फंसा लिया। वीडियो कॉल के जरिए जांच का हवाला देकर बुजुर्ग को गिरफ्तारी की धमकी दी गई और करीब 22 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखकर उनसे लगभग 34 लाख रुपये ठग लिए गए।
बताया जा रहा है कि साइबर ठगों ने पीड़ित से वीडियो कॉल के जरिए संपर्क किया। कॉल करने वालों ने खुद को पुणे एटीएस का अधिकारी बताया और दावा किया कि पीड़ित के नाम से जुड़ा कोई मामला जांच के दायरे में है। इसके बाद ठगों ने बुजुर्ग को कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का भय दिखाकर मानसिक दबाव में ले लिया।
आरोप है कि ठगों ने उन्हें लगातार वीडियो कॉल पर रहने और उनके निर्देशों का पालन करने के लिए मजबूर किया। इस दौरान जांच के नाम पर अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई। करीब 22 दिनों तक चले इस कथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ के दौरान पीड़ित से 34 लाख रुपये की ठगी कर ली गई।
ठगी का अहसास होने के बाद पीड़ित ने मामले की जानकारी परिजनों को दी और साइबर पुलिस से संपर्क किया। शिकायत के आधार पर साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। पुलिस अब बैंक खातों में हुए लेनदेन, रकम ट्रांसफर कराने वाले खातों और आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों व डिजिटल माध्यमों की जांच कर रही है।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बढ़ रहे मामले
साइबर ठग अब पुलिस, सीबीआई, ईडी, आरबीआई और अन्य सरकारी एजेंसियों के अधिकारी बनकर लोगों को डराने का तरीका अपना रहे हैं। वीडियो कॉल के जरिए फर्जी पूछताछ और गिरफ्तारी का भय दिखाकर पीड़ित को मानसिक दबाव में लिया जाता है। इसके बाद जांच से बचाने या मामला खत्म करने के नाम पर रकम मांगी जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार कोई भी वास्तविक पुलिस या जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को इस तरह ‘डिजिटल अरेस्ट’ करके पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर नहीं करती। ऐसे किसी भी कॉल पर घबराने के बजाय तुरंत कॉल काटकर संबंधित पुलिस या साइबर क्राइम थाने से संपर्क करना चाहिए।


