फर्रुखाबाद। गंगा और रामगंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी से जिले में बाढ़ का खतरा एक बार फिर बढ़ गया है। सिंचाई विभाग की 7 अक्टूबर 2026 की सुबह 8 बजे की रिपोर्ट के अनुसार गंगा का जलस्तर 136.40 मीटर दर्ज किया गया। गंगा का चेतावनी बिंदु 136.60 मीटर और खतरे का निशान 137.10 मीटर है। गंगा अब चेतावनी बिंदु से महज 20 सेंटीमीटर नीचे बह रही है।
वहीं रामगंगा का जलस्तर 136.60 मीटर पहुंच गया है। रामगंगा का चेतावनी बिंदु भी 136.60 मीटर है, यानी नदी का पानी चेतावनी स्तर पर पहुंच चुका है। खतरे का निशान 137.10 मीटर है। ऐसे में रामगंगा खतरे के निशान से महज 50 सेंटीमीटर नीचे है। जलस्तर में मामूली बढ़ोतरी भी नदी किनारे के निचले इलाकों के लिए मुश्किल बढ़ा सकती है।
नरौरा से गंगा में 39,179 क्यूसेक पानी छोड़ा
सिंचाई विभाग के आंकड़ों के मुताबिक नरौरा बैराज से गंगा में 39,179 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। वहीं रामगंगा से जुड़े बैराजों से भी पानी छोड़ा गया। खो बैराज से 350 क्यूसेक, हरौली बैराज से 207 क्यूसेक और रामनगर बैराज से 2,128 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इन तीनों से रामगंगा में कुल 2,679 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया।
पांचाल घाट और ब्रह्मदत्त द्विवेदी सेतु पर माप
गंगा के जलस्तर की माप लोहिया सेतु (पांचाल घाट) और रामगंगा के जलस्तर की माप ब्रह्मदत्त द्विवेदी सेतु पर की गई। दोनों नदियों के जलस्तर पर सिंचाई विभाग की लगातार नजर बनी हुई है। जलस्तर बढ़ने की स्थिति में नदी किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
गंगा खतरे से 70, रामगंगा 50 सेंटीमीटर दूर
मौजूदा आंकड़ों के अनुसार गंगा का पानी खतरे के निशान से 70 सेंटीमीटर नीचे, जबकि रामगंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 50 सेंटीमीटर नीचे है। रामगंगा के चेतावनी बिंदु पर पहुंचने से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। अमृतपुर, राजेपुर और शमसाबाद क्षेत्र के नदी किनारे बसे इलाकों में जलस्तर पर लगातार निगरानी जरूरी हो गई है।
जलस्तर में बढ़ोतरी जारी रहने पर खेतों, संपर्क मार्गों और निचले इलाकों में पानी पहुंचने की आशंका बढ़ सकती है। ऐसे में आने वाले घंटों में नदियों के जलस्तर में होने वाला बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


