– 3 दारोगा समेत 44 पुलिसकर्मी लाइन हाजिर
– 41 कारखास भी कार्रवाई की जद में
– वसूली और मनमानी के खिलाफ सख्त संदेश
झांसी। पुलिस विभाग में अनुशासन और पारदर्शिता को लेकर एसएसपी विकास कुमार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। पुलिस व्यवस्था में कथित रूप से प्रभाव रखने वाले ‘कारखास’ नेटवर्क पर कार्रवाई करते हुए 3 दारोगा समेत 44 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया है। कार्रवाई में 41 कारखास भी शामिल बताए जा रहे हैं।
पुलिस विभाग में इस कार्रवाई को लेकर दिनभर चर्चा बनी रही। खास बात यह है कि कार्रवाई का दायरा केवल थाने स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि चौकी इंचार्ज से लेकर सीओ स्तर से जुड़े खास ड्राइवरों तक कार्रवाई की जद में आने की बात सामने आई है। इससे साफ संकेत गया है कि पुलिसिंग के नाम पर किसी भी स्तर पर अनधिकृत प्रभाव, मनमानी या वसूली की शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
बताया जा रहा है कि पुलिस विभाग में कुछ कर्मियों की भूमिका को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे थे। ‘कारखास’ के रूप में काम करने वाले पुलिसकर्मियों पर अधिकारियों और थानों के बीच अनौपचारिक संपर्क तथा विभिन्न कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि प्रत्येक कर्मचारी के खिलाफ आरोपों की प्रकृति और सत्यता संबंधित जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
एसएसपी के इस फैसले को पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही और अनुशासन मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। कार्रवाई से यह संदेश देने की कोशिश दिखाई दे रही है कि पुलिस की वर्दी और पद का इस्तेमाल निजी प्रभाव अथवा किसी अनुचित गतिविधि के लिए नहीं किया जा सकता।
पुलिस महकमे में एक साथ 44 कर्मियों पर कार्रवाई से अधीनस्थ स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। खासकर उन पुलिसकर्मियों में बेचैनी देखी जा रही है, जिनकी भूमिका अधिकारियों के साथ अनौपचारिक रूप से जुड़ी बताई जाती रही है।
कार्रवाई के बाद अब संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका और उनके संबंध में सामने आए तथ्यों की समीक्षा किए जाने की बात सामने आ रही है। पुलिस प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि कार्रवाई के बाद थानों और चौकियों में ऐसी व्यवस्था कायम रहे, जिसमें आम नागरिकों को बिना किसी दबाव या अतिरिक्त प्रभाव के पुलिस सेवाएं मिल सकें।
एसएसपी विकास कुमार की इस कार्रवाई ने फिलहाल पुलिस महकमे में यह स्पष्ट संदेश दिया है कि वर्दी के पीछे छिपकर मनमानी करने वालों के लिए विभागीय स्तर पर कोई नरमी नहीं होगी। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि जांच के बाद किन मामलों में आगे विभागीय या कानूनी कार्रवाई होती है और पुलिस व्यवस्था में इस अभियान का कितना स्थायी असर दिखाई देता है।


