अमृतपुर। गंगा का जलस्तर धीरे-धीरे घटने लगा है, लेकिन बाढ़ प्रभावित गांवों में ग्रामीणों की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। पानी कम होने के बाद गांवों की गलियों और संपर्क मार्गों पर कीचड़ जमा हो गया है। कई स्थानों पर अब भी जलभराव होने से लोगों का आवागमन प्रभावित है। ग्रामीणों को जरूरी काम के लिए पानी और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ रहा है।
आशा की मड़ैया, तीस राम की मड़ैया, फखरपुर, मंझा की मड़ैया और किराचन समेत कई गांवों में स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी है। रास्तों पर जगह-जगह गड्ढों में पानी भरा होने से ग्रामीणों को पैदल निकलने में भी परेशानी हो रही है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए भी कीचड़ भरे रास्ते हादसे का कारण बन सकते हैं।
दिन में तेज धूप निकलने के कारण जलभराव वाले इलाकों में उमस और गर्मी बढ़ गई है। वहीं लंबे समय से जमा पानी में मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि गड्ढों और जलभराव में मच्छर पनप रहे हैं, जिससे मच्छरजनित बीमारियों के फैलने की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों ने जलभराव वाले स्थानों पर साफ-सफाई और कीटनाशक का छिड़काव कराने की मांग की है।
ग्रामीण सर्वेश, महिपाल, राजेश, विनोद और अंकित शर्मा ने बताया कि पानी घटने के बावजूद गांवों की स्थिति अभी सामान्य नहीं हुई है। गलियों में कीचड़ और पानी जमा होने से बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। कई जगहों पर रास्तों की स्थिति खराब होने के कारण लोगों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है।
उधर, रामगंगा की बाढ़ का पानी अमैयापुर पुलिया के आसपास भी कम हुआ है, जिससे लोगों को कुछ राहत मिली है। हालांकि खेतों में अब भी पानी भरा होने से किसानों की चिंता बढ़ी हुई है। जलभराव के कारण मक्का, धान, बाजरा और गन्ने की फसलों को नुकसान पहुंचा है। ग्रामीणों का कहना है कि फसल खराब होने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से गांवों में जलभराव वाले रास्तों की सफाई, कीचड़ हटाने, मच्छरों की रोकथाम के लिए दवा का छिड़काव कराने और खराब रास्तों को दुरुस्त कराने की मांग की है, ताकि बाढ़ का पानी उतरने के बाद जनजीवन जल्द सामान्य हो सके।


