– अमृतपुर में टकराव के संकेत
अमृतपुर/फर्रुखाबाद। फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेस-वे परियोजना अब केवल विकास की सड़क नहीं रह गई है, बल्कि यह किसानों और प्रशासन के बीच सीधी टकराव की वजह बनती जा रही है। शुक्रवार को गांव गांधी के निकट उस समय माहौल गरमा गया जब प्रशासनिक टीम भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष अजय कटियार के पेट्रोल पंप और गेस्ट हाउस की भूमि की पैमाइश करने पहुंची। प्रशासन ने साफ संदेश दिया कि प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना किसी भी कीमत पर नहीं रुकेगी, जबकि भाकियू ने चेतावनी दी है कि किसानों के हक पर चोट हुई तो बड़ा आंदोलन होगा।
भारी पुलिस बल, राजस्व टीम और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में एसडीएम रविंद्र सिंह और तहसीलदार शशांक सिंह ने प्रस्तावित कट के लिए भूमि का सर्वे कराया। जैसे ही नापजोख शुरू हुई, भाकियू कार्यकर्ता विरोध में उतर आए। तहसील अध्यक्ष सोनू सोमवंशी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने कार्रवाई का विरोध किया और अधिकारियों के साथ तीखी बहस भी हुई।
इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में भाकियू जिलाध्यक्ष अजय कटियार हैं, जिनका पेट्रोल पंप और गेस्ट हाउस प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे कट की जद में बताया जा रहा है। शुक्रवार को तहसील मुख्यालय पर सैकड़ों किसानों के साथ धरने पर बैठे अजय कटियार ने प्रशासन और सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कटियार ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा, “किसानों की हर लड़ाई लड़ेंगे। अगर किसानों के अधिकारों पर डाका डालने की कोशिश हुई तो ईंट से ईंट बजा देंगे।”
राजनीतिक गलियारों में भी इस संघर्ष को लेकर चर्चा तेज है। पूर्व में कांग्रेस और बसपा की राजनीति से जुड़े रहे अजय कटियार पहले से ही भाजपा सरकार के खिलाफ मुखर रहे हैं। उनके समर्थकों का आरोप है कि किसानों की आवाज उठाने के कारण उन पर एक दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जबकि प्रशासनिक सूत्र इसे कानून व्यवस्था से जुड़ी कार्रवाई बताते हैं।
दूसरी ओर प्रशासन का रुख पूरी तरह सख्त दिखाई दे रहा है। अधिकारियों का कहना है कि लिंक एक्सप्रेस-वे क्षेत्र के विकास, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा। एसडीएम रविंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि परियोजना से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं शासन के निर्देशानुसार पूरी की जाएंगी और पात्र किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा।
स्थानीय स्तर पर भी राय बंटी हुई नजर आ रही है। एक वर्ग का मानना है कि एक्सप्रेस-वे बनने से अमृतपुर क्षेत्र की तस्वीर बदल जाएगी, वहीं प्रभावित किसान अपनी जमीन, व्यवसाय और आजीविका को लेकर चिंतित हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन और किसानों के बीच सहमति का रास्ता निकलेगा या फिर फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेस-वे आने वाले दिनों में एक बड़े किसान आंदोलन की जमीन तैयार करेगा? फिलहाल तहसील मुख्यालय से लेकर जिला प्रशासन तक माहौल गर्म है और पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक नजरें भी टिकी हुई हैं।


