– तहसीलदार को मोटी रकम दे किया समर्थन में
– ग्राम समाज की भूमि के नाम राजस्व कर्मियों की खुलेआम डकैती पुलिस भी शामिल
– 30 वर्षों से बसे परिवारों ने डीएम से लगाई गुहार
– सरे बाजार भू माफियागिरी को तहसील प्रशासन का खुला संरक्षण
अरौल,कानपुर। बिल्हौर तहसील क्षेत्र मे अरौल थाना के निकट धर्मशाला गांव की सड़क किनारे अरौल मे जमीन पर अबैध ढंग से प्लॉटिंग के खेल मे राजस्व कर्मियों से साठ गाठ कर दबंग ने तहसीलदार और थानाअध्यक्ष सहित भारी पुलिस बल की मौजूदगी में रिहायशी दुकानों और बाजार पर ग्राम समाज की छोटी सी जमीन का बहाना लेकर बुधवार को नेहरू विद्यालय इंटर कॉलेज अरौल पर बुलडोजर चलवा दिया विरोध करने गए लोगों को पुलिस ने मुकदमे इलाज देने की धमकी देकर जमकर खड़ेदा, स्थानीय विधायक राहुल बच्चा ने भी जब मामले से पल्ला झाड़ लिया सपा नेत्री रचना सिंह ने मौके पर पहुंचे विरोध किया तो उन्हें भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पीड़ितों ने उप जिलाधिकारी बिल्हौर से न्याय की गुहार लगाई है साथी जिलाधिकारी के समक्ष पूरा प्रकरण रखने की भी बात कही है।
पीड़ित लोगों ने आरोप लगाया है कि जिस भूमि पर कई परिवार करीब 30 वर्षों से मकान और दुकानें बनाकर रह रहे हैं, उसे लेकर अब उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है। तहसीलदार और अरौल थाना पुलिस दबंग के हाथों की कठपुतली बनकर उनका शोषण करने पर अमादा हैं।
शिकायत के मुताबिक, आवेदकों ने संबंधित भूमि का हिस्सा पूर्व खातेदार स्वर्गीय अवधेश चंद्र के पुत्र मोहन लाल से खरीदा था। जमीन की खरीद के बाद वहां मकान और दुकानें बनाई गईं और लंबे समय से लोग शांतिपूर्वक रह रहे हैं।
शिकायत में कहा गया है कि अवधेश चंद्र की मृत्यु के करीब दस वर्ष बाद उनके पुत्र अरविंद त्रिपाठी द्वारा उक्त भूमि को लेकर आपत्ति की जा रही है, क्योंकि भाई इस जमीन के पीछे वाली जमीन पर प्लाटिंग करना चाह रहे हैं और उसे खेत के लिए उन्हें पहले से बनी गेट बंद कॉलोनी से जबरिया रास्ता निकलवाना है इसके लिए उन्होंने राजस्व कर्मी और पुलिस को मोटी न्योछावर भी दे रखी है। खुलेआम लोगों को धमकाया जा रहा है और सड़क तथा दुकानों को लेकर दबाव बनाया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उनसे कहा गया कि यदि सड़क नहीं खोली गई तो वर्षों पुरानी दुकानों को गिरवा दिया जाएगा। तहसीलदार खुद पार्टी बने हुए हैं और रोज आकर धमका रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर इस विवाद को लेकर सबसे बड़ी चर्चा है कि यदि वर्षों से बने मकान और दुकानें हटाई जाती हैं तो उसके बाद इस जमीन का इस्तेमाल किस उद्देश्य से होगा।
गौरतलब है कि, विवाद सिर्फ रास्ते या दीवार का नहीं, बल्कि भूमि को खाली कर रास्ता निकलवाने का है ताकि पीछे पड़ी खाली जमीन पर दबंग अवैध प्लाटिंग कर करोड़ों का मुनाफा कमा सके।सूत्रों का तो यह तक कहना है की तहसीलदार ने होने वाली अवैध प्लाटिंग में अंदर खाने अपनी साझेदारी भी तय की है । इस संबंध में जिलाधिकारी कार्यालय ने मामले का संज्ञान लिया है और कहा है कि यदि स्कूल, दुकानें और वर्षों से बसे परिवार परेशान होते हैं तो खाली हुई जमीन पर निर्माण अथवा प्लॉटिंग की संभावनाओं की भी जांच जरूरी होगी।
उधर पीड़ितों ने एसडीएम बिल्हौर से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान करने पर रोक लगाई जाए और यदि आरोप सही पाए जाएं तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाए।


