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Wednesday, August 12, 2026

शाह का विपक्ष को खुला ऑफर: चर्चा करो, हर सवाल का जवाब दूंगा : गृहमंत्री

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आज 3 बजे से सदन में बैठने का ऐलान

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में लगातार जारी गतिरोध के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को विपक्ष को खुली चुनौती देते हुए कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि विपक्ष आज दोपहर तीन बजे से चर्चा शुरू करे, वह खुद सदन में मौजूद रहेंगे, सभी को सुनेंगे और गुरुवार दोपहर तीन बजे हर सवाल का जवाब देंगे।

शाह ने कहा कि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है। विपक्ष को सदन चलने देना चाहिए और जिस भी विषय पर चर्चा करनी है, वह सदन में करे। उन्होंने कहा कि अब जनता तय करे कि चर्चा से वास्तव में कौन भाग रहा है।

हंगामे के बीच दोनों सदन दो बजे तक स्थगित

मानसून सत्र के 18वें दिन भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव जारी रहा। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने हंगामा किया। इसके बाद दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी गई। विपक्ष राम मंदिर चढ़ावा चोरी और जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के मामले में गृह मंत्री के बयान की मांग पर अड़ा है।

खड़गे बोले—कल भी कुछ नहीं होगा

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर अमित शाह से जवाब मांगा। विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन करते हुए ‘अमित शाह जवाब दो’ के नारे लगाए। खड़गे ने कहा कि कल भी कुछ नहीं होगा और विपक्ष अपना विरोध जारी रखेगा।

संसद में हर मिनट 2.5 लाख रुपये खर्च का दावा

लगातार हंगामे के कारण संसद की कार्यवाही प्रभावित होने पर खर्च को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल के मुताबिक संसद चलाने में हर मिनट करीब 2.5 लाख रुपये खर्च होते हैं। मानसून सत्र के दौरान अब तक कई दिन हंगामे की भेंट चढ़ चुके हैं। विपक्ष और सरकार के टकराव के बीच करोड़ों रुपये के संसदीय समय के नुकसान का दावा किया जा रहा है।

FCRA विधेयक पर भी टकराव

संसद में विदेशी अंशदान नियमन संशोधन विधेयक-2026 को लेकर भी सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। सरकार इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने पर विचार कर रही है। विपक्ष का आरोप है कि विधेयक से अल्पसंख्यक और ईसाई संस्थाओं की विदेशी फंडिंग प्रभावित हो सकती है, जबकि सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और निगरानी बढ़ाना है।

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