जिले में बेखौफ दौड़ रहे खनन के वाहन
फर्रुखाबाद। एंटी करप्शन टीम के हाथों रिश्वत लेते पकड़े गए खनन अधिकारी संजय प्रताप के जेल जाने के बाद जिले में खनन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद अभी तक जिले में नए खनन अधिकारी की तैनाती नहीं हुई है। इसी खालीपन का फायदा उठाकर अवैध खनन का खेल फिर जोर पकड़ने लगा हैं।
बताया जा रहा है कि जिले के कई इलाकों में खनन माफिया पुलिस की मिलीभगत से तेजी से सक्रिय हैं। रात के अंधेरे में तो छोडो दिन दहाड़े खनन कर मिट्टी बालू लदे वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस की सह के कारण खनन माफियाओं को न तो कार्रवाई का डर है और न ही किसी रोक-टोक की चिंता।
खनन अधिकारी के जेल जाने के बाद जिले में विभागीय निगरानी कमजोर पड़ने के आरोपों ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि जब जिले में खनन विभाग का जिम्मेदार अधिकारी ही तैनात नहीं है तो अवैध खनन की निगरानी और कार्रवाई कौन कर रहा है क्या जिम्मेदार अधिकारियों को इलाके में चल रहे खनन की भनक नहीं है या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंद ली गई हैं
पुलिस की भूमिका पर भी सवाल
ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस की मिलीभगत के बिना इस तरह बड़े पैमाने पर अवैध खनन और वाहनों का संचालन संभव नहीं है। यदि आरोप सही हैं तो यह सिर्फ खनन माफिया का खेल नहीं, बल्कि पूरे संरक्षण तंत्र की गंभीर तस्वीर है।
खनन अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद विभाग की कार्रवाई का इंतजार कर रहे लोगों का कहना है कि अधिकारी बदला, लेकिन खनन का खेल नहीं बदला। अब निगाहें जिलाधिकारी और पुलिस प्रशासन पर हैं कि वे इन आरोपों की जांच कराकर अवैध खनन पर लगाम लगाते हैं या फिर माफिया इसी तरह सरकारी व्यवस्था को चुनौती देते रहेंगे।


