नई दिल्ली। नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर दुनिया के प्रमुख मीडिया संस्थानों ने भारत की कूटनीतिक भूमिका को अहम बताया है। रॉयटर्स ने सम्मेलन को भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता बताते हुए कहा कि भारत ने ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, चीन और रूस जैसे अलग-अलग हितों वाले देशों को साझा घोषणापत्र पर सहमत कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पश्चिम एशिया में तनाव और सदस्य देशों के अलग-अलग रुख के बावजूद साझा बयान पर सहमति बनना भारत के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक भारत ने ब्रिक्स को किसी एक देश या शक्ति के प्रभाव वाला मंच बनाने के बजाय विकासशील देशों के सहयोग और साझा हितों पर केंद्रित रखने की कोशिश की।
फाइनेंशियल टाइम्स ने भारत और चीन के नजरिए में अंतर को प्रमुखता से रेखांकित किया। रिपोर्ट के अनुसार चीन ब्रिक्स को वैश्विक ताकत के रूप में मजबूत कर अमेरिकी नेतृत्व वाली व्यवस्था के विकल्प के तौर पर देखता है, जबकि भारत इसे सीधे अमेरिका-विरोधी गुट के बजाय विकासशील देशों के सहयोग का मंच बनाए रखना चाहता है।
द न्यूयॉर्क टाइम्स ने ब्रिक्स को भारत और चीन के बीच बढ़ते वैश्विक प्रभाव की प्रतिस्पर्धा के नजरिए से देखा। वहीं चीन के मीडिया ने ब्रिक्स को वैश्विक शक्ति संतुलन बदलने की क्षमता वाला मंच बताया। ग्लोबल टाइम्स ने भारत और चीन की ताकतों के संभावित मेल को वैश्विक दक्षिण के लिए फायदेमंद बताया।
ब्रिटिश अखबार द गार्जियन ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों में सुधार के संकेत के तौर पर देखा। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ब्रिक्स देशों के अपने-अपने हित और मतभेद हैं। इसके बावजूद साझा घोषणापत्र पर सहमति बनना समूह की सामूहिक कूटनीतिक क्षमता को दर्शाता है।
कुल मिलाकर, नई दिल्ली सम्मेलन में भारत ने यह संदेश देने की कोशिश की कि ब्रिक्स किसी एक शक्ति के खिलाफ खड़ा गुट नहीं, बल्कि अलग-अलग विचारों और हितों वाले देशों के बीच सहयोग का मंच है। दुनिया के प्रमुख मीडिया की प्रतिक्रियाओं में भारत की इसी संतुलित कूटनीति को सम्मेलन की बड़ी उपलब्धियों में गिना गया है।


