लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मानसूनी बारिश के बीच नदियां उफान पर हैं और कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। प्रदेश के 26 जिलों में करीब चार लाख की आबादी प्रभावित बताई गई है। चंदौली में छह बांध ओवरफ्लो होने के बाद उनके फाटक खोलकर 5,256 क्यूसेक पानी नदियों में छोड़ा गया। लतीफशाह बांध से पानी झरने की तरह बहता नजर आया।
बलिया में गंगा और सरयू खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। सदर, बैरिया और बांसडीह तहसील के कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं, जबकि निचले इलाकों में पानी भरने से आवागमन के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। मऊ में सरयू का जलस्तर 10 सेंटीमीटर घटने के बावजूद खतरे के निशान से 45 सेंटीमीटर ऊपर है।
कन्नौज में समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण बाढ़ प्रभावित गांवों का जायजा लेने पहुंचे। जलभराव के कारण उनकी कार गांव तक नहीं पहुंच सकी, जिसके बाद मंत्री अधिकारियों के साथ ट्रैक्टर और नाव से प्रभावित इलाकों में पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और राहत सामग्री भी बांटी।
लखीमपुर खीरी में शारदा नदी का कटान तेज होने से जमीन और पेड़ नदी में समा रहे हैं। बाराबंकी में सरयू-घाघरा के कटान ने चिंता बढ़ा दी है। यहां एक मस्जिद का हिस्सा नदी के ऊपर लटका हुआ है और कई मकान व सैकड़ों बीघा जमीन कटान की भेंट चढ़ चुकी है। बदायूं और गोंडा में भी बाढ़ के पानी से पुल और सड़कें प्रभावित हुई हैं।
फर्रुखाबाद में गंगा और रामगंगा की दोहरी मार से अमृतपुर क्षेत्र के करीब 60 गांव प्रभावित हैं। गंगा खतरे के निशान के आसपास और रामगंगा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। कई रास्तों पर पानी भरने से ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी हो रही है। सोनभद्र में रिहंद बांध के जलस्तर पर भी लगातार नजर रखी जा रही है।
मौसम विभाग ने सोमवार को प्रदेश के 70 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने मौसम तंत्र के कारण मानसून अभी सक्रिय है और अगले कुछ दिनों तक पूर्वी उत्तर प्रदेश समेत कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। पिछले दो दिनों में बारिश और बाढ़ से प्रदेश में 10 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है।


