फर्रुखाबाद। किसानों को कीटनाशकों के सुरक्षित और अनुमोदित प्रयोग के प्रति जागरूक करने के लिए जिला कृषि रक्षा अधिकारी शैलेन्द्र कुमार वर्मा ने किसानों से अपील की है कि वे फसल के अनुसार स्वीकृत कीटनाशकों का ही प्रयोग करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रतिबंधित फसलों में कीटनाशकों का इस्तेमाल फसल, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
शैलेन्द्र कुमार वर्मा ने बताया कि ऑक्सीफ्लोरोफेन का आलू एवं मूंगफली की फसल में प्रयोग न करें। मैलाथियान का ज्वार, मटर, सोयाबीन, अरंडी, सूरजमुखी, भिंडी, बैंगन, फूलगोभी, मूली, शलजम, टमाटर, सेब एवं अंगूर में प्रयोग प्रतिबंधित है। इसी तरह मोनोक्रोटोफॉस का सब्जियों तथा क्लोरपाइरीफॉस का बेर, साइट्रस एवं तंबाकू की फसल में इस्तेमाल न करने के निर्देश हैं।उन्होंने कहा कि डायमेथोएट का ऐसी फसलों एवं सब्जियों में प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए, जिन्हें कच्चे रूप में खाद्य पदार्थ के तौर पर खाया जाता है। वहीं मैन्कोजेब का अरहर, ज्वार एवं टेफपोडा की फसल में प्रयोग न करने की सलाह दी गई है।जिला कृषि रक्षा अधिकारी शैलेन्द्र कुमार वर्मा ने किसानों से कहा कि किसी भी कीटनाशक का प्रयोग करने से पहले उसके लेबल पर दर्ज अनुमोदित फसल, कीट, मात्रा, प्रयोग विधि और प्रतीक्षा अवधि संबंधी निर्देशों को जरूर पढ़ें और उनका पालन करें। उन्होंने बताया कि गलत फसल में कीटनाशक के प्रयोग से फसल एवं पर्यावरण को नुकसान पहुंचने के साथ खाद्य पदार्थों में कीटनाशक अवशेष की मात्रा बढ़ सकती है।
शैलेन्द्र कुमार वर्मा ने किसानों को समेकित कीट प्रबंधन अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग केवल आवश्यकता और कीट की सही पहचान के आधार पर ही किया जाए। सुरक्षित एवं संतुलित कीटनाशक प्रयोग से फसल की गुणवत्ता के साथ मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण की भी रक्षा की जा सकती है।
फसल के अनुसार ही करें कीटनाशकों का प्रयोग : शैलेंद्र कुमार वर्मा


