वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाला प्रशासन रोजगार, उच्च शिक्षा और स्थायी निवास से जुड़े वीजा नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित नई व्यवस्था के तहत रोजगार आधारित वीजा, स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड), छात्र वीजा और पढ़ाई पूरी करने के बाद अस्थायी रूप से काम करने की अनुमति से जुड़े नियम पहले की तुलना में अधिक सख्त किए जा सकते हैं। यदि ये प्रस्ताव लागू होते हैं तो इसका सबसे अधिक प्रभाव अमेरिका में नौकरी करने के इच्छुक भारतीय युवाओं, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के पेशेवरों, शोधार्थियों और उच्च शिक्षा के लिए जाने वाले छात्रों पर पड़ने की आशंका है।
अमेरिकी प्रशासन की योजना रोजगार आधारित वीजा के पात्रता नियमों को और कड़ा करने की है। इसके साथ ही उन कंपनियों पर विशेष निगरानी रखने का प्रस्ताव है, जो अपने कर्मचारियों को दूसरे संस्थानों या कंपनियों में कार्य के लिए भेजती हैं। जिन संस्थानों पर पहले वीजा नियमों के उल्लंघन के आरोप लगे हैं, उनकी भी गहन जांच की जाएगी। इसके अलावा, कार्य करने की अस्थायी अनुमति के स्वतः बढ़ने की व्यवस्था समाप्त करने पर भी विचार किया जा रहा है।
ये प्रस्ताव अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग, श्रम विभाग और विदेश विभाग के नियामक एजेंडे का हिस्सा बताए जा रहे हैं। हालांकि अभी इन नियमों को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। इन्हें लागू करने से पहले कानूनी प्रक्रिया, सार्वजनिक सुझाव और औपचारिक अधिसूचना जैसी कई चरणों से गुजरना होगा। भारत उन देशों में शामिल है, जहां से सबसे अधिक संख्या में कुशल पेशेवर और विद्यार्थी अमेरिका जाते हैं। ऐसे में यदि नियम सख्त होते हैं तो भारतीय युवाओं के लिए नौकरी प्राप्त करना, उच्च शिक्षा के बाद वहीं कार्य करना और स्थायी निवास हासिल करना पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इससे भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों और अमेरिका में कार्यरत हजारों भारतीय कर्मचारियों पर भी व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है।


