– पहले भी खरीदते थे और आगे भी खरीदते रहेंगे
नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका ने रूसी कच्चे तेल की खरीद पर लागू राहत अवधि को एक महीने के लिए और बढ़ा दिया है। इस फैसले के बाद भारत ने भी साफ शब्दों में कहा है कि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए पहले भी रूस से तेल खरीदता रहा है और आगे भी खरीद जारी रखेगा।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है और अपनी कुल जरूरत का करीब 85 प्रतिशत तेल विदेशों से खरीदता है। यूक्रेन युद्ध से पहले भारत रूस से बेहद सीमित मात्रा में तेल आयात करता था। वर्ष 2021 तक भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी केवल 1 से 2 प्रतिशत थी, लेकिन पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और रूस द्वारा भारी छूट दिए जाने के बाद भारत ने बड़े पैमाने पर रूसी तेल खरीदना शुरू कर दिया।
ऊर्जा बाजार के हालिया आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 में भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 38 से 40 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। भारत प्रतिदिन करीब 50 लाख बैरल कच्चे तेल का आयात कर रहा है, जिसमें 18 से 20 लाख बैरल प्रतिदिन तेल रूस से खरीदा जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार रूस भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजार दर से 8 से 15 डॉलर प्रति बैरल तक सस्ता तेल उपलब्ध करा रहा है। कई बार यह छूट 35 से 40 प्रतिशत तक पहुंची है। इसका सीधा फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था को मिला है। अनुमान है कि पिछले दो वर्षों में भारत ने रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदकर करीब 7 से 10 अरब डॉलर तक की बचत की है।
अमेरिका और यूरोपीय देशों ने यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन वैश्विक बाजार में तेल संकट और कीमतों में उछाल को रोकने के लिए समय-समय पर सीमित राहत भी दी जाती रही है। अब अमेरिका द्वारा छूट की अवधि बढ़ाने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार को कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि देश किसी बाहरी दबाव के बजाय अपने आर्थिक हितों और ऊर्जा सुरक्षा के आधार पर निर्णय लेता है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों और उद्योगों को सस्ती तथा स्थिर ऊर्जा उपलब्ध कराना है। यही वजह है कि जहां बेहतर कीमत और विश्वसनीय आपूर्ति मिलती है, वहां से तेल खरीद जारी रहेगी।


