लखनऊ। प्रदेश में बढ़ती कारोबारी गतिविधियों का सकारात्मक असर राज्य के राजस्व पर साफ दिखाई दे रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के अप्रैल माह में प्रदेश सरकार को पिछले वर्ष की तुलना में 2416.42 करोड़ रुपये अधिक राजस्व प्राप्त हुआ है। इस वृद्धि में जीएसटी और आबकारी विभाग का सबसे बड़ा योगदान रहा है, जिससे सरकार के खजाने में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
सुरेश कुमार खन्ना ने बुधवार को प्रेसवार्ता में बताया कि अप्रैल 2026 में करों से 27,526.49 करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके सापेक्ष 20,621.24 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई। जबकि अप्रैल 2025 में यह आंकड़ा 18,204.82 करोड़ रुपये था। इस प्रकार एक वर्ष में कर संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
राजस्व में वृद्धि के आंकड़ों पर नजर डालें तो जीएसटी से 839.86 करोड़ रुपये, आबकारी से 931.56 करोड़ रुपये, वैट से 114.28 करोड़ रुपये, स्टांप एवं निबंधन से 141.32 करोड़ रुपये, परिवहन से 273.87 करोड़ रुपये तथा भूतत्व एवं खनिकर्म से 114.53 करोड़ रुपये अधिक प्राप्त हुए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में बढ़ी खरीद-फरोख्त और आर्थिक गतिविधियों में तेजी इसका प्रमुख कारण है।
वित्त मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अन्य राज्यों की तुलना में अपेक्षाकृत कम हैं। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में पेट्रोल 94.69 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.80 रुपये प्रति लीटर की दर से उपलब्ध है, जो कई राज्यों के मुकाबले सस्ता है।
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों में आई तेजी का सीधा लाभ सरकार के राजस्व पर पड़ा है, जिससे प्रदेश की वित्तीय स्थिति मजबूत होती नजर आ रही है।


