फर्रुखाबाद। गंगा एक्सप्रेस-वे को लेकर एक बार फिर जनपद की सियासत और जनभावनाएं उफान पर हैं। फर्रुखाबाद को इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना से बाहर रखे जाने को लेकर लोगों में गहरा असंतोष देखा जा रहा है। आमजन इसे सिर्फ एक सड़क परियोजना से जोड़कर नहीं देख रहे, बल्कि इसे जिले के विकास, सम्मान और भविष्य से जुड़ा बड़ा सवाल मान रहे हैं।
गौरतलब है कि गंगा किनारे बसा फर्रुखाबाद ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्त्वपूर्ण जनपद है। ऐसे में प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे का यहां से न गुजरना स्थानीय लोगों को अखर रहा है। लोगों का कहना है कि यदि यह परियोजना जिले से होकर गुजरती, तो न केवल यातायात सुविधाएं बेहतर होतीं, बल्कि रोजगार, व्यापार और शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलता।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, एक्सप्रेस-वे के माध्यम से हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिल सकते थे। साथ ही, बेहतर कनेक्टिविटी से जिले में निवेश की संभावनाएं बढ़तीं और पलायन पर भी अंकुश लगता। इसके अलावा, गंगा की बाढ़ से हर साल होने वाले नुकसान को तटबंध-सह-एक्सप्रेस-वे के माध्यम से काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता था, जिससे हजारों परिवारों को राहत मिलती।
इतना ही नहीं, एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन कार्यक्रम में भी जनपद के जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा ने लोगों की नाराजगी को और बढ़ा दिया है। इसे लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक बार फिर भाजपा के कद्दावर नेता स्वर्गीय ब्रह्म दत्त द्विवेदी की याद लोगों को आने लगी है। जनमानस का मानना है कि यदि द्विवेदी आज होते, तो फर्रुखाबाद के हितों की अनदेखी नहीं होने देते। लोग यह भी कह रहे हैं कि उनके मजबूत नेतृत्व में कोई भी बड़ा फैसला जिले के हितों के खिलाफ नहीं जा पाता।
जनता अब अपने जनप्रतिनिधियों से जवाब चाहती है और यह सवाल उठ रहा है कि आखिर किन परिस्थितियों में फर्रुखाबाद जैसे महत्वपूर्ण जनपद को इस परियोजना से वंचित कर दिया गया। लोगों का मानना है कि अब समय आ गया है कि जनप्रतिनिधि आत्ममंथन करें और जिले के हक व विकास के लिए ठोस कदम उठाएं।
फिलहाल, गंगा एक्सप्रेस-वे को लेकर फर्रुखाबाद में असंतोष की लहर थमने का नाम नहीं ले रही है और यह मुद्दा आने वाले समय में सियासी रूप से और भी गरमाने के आसार हैं।एक्सप्रेसवे के उद्घाटन कार्यक्रम में जनपद के जन्म प्रतिनिधियों की उपेक्षा लोगों के गले नहीं उतर पा रही है।
गंगा एक्सप्रेस-वे के मुद्दे पर फिर याद आए स्व. ब्रह्म दत्त द्विवेदी उपकार मणि “उपकार”


