फर्रुखाबाद। जनपद में गेहूं खरीद व्यवस्था की सच्चाई परखने के लिए जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने सातनपुर मंडी स्थित राजकीय खरीद केंद्र पर औचक निरीक्षण कर अधिकारियों में हड़कंप मचा दिया। बिना पूर्व सूचना पहुंचीं डीएम ने सीधे रिकॉर्ड खंगाले और मौके पर गुणवत्ता जांच कर सिस्टम को स्पष्ट किया कि अब किसी भी स्तर पर गड़बड़ी नहीं चलेगी।
निरीक्षण के दौरान डीएम डॉ लाठर ने टोकन रजिस्टर, क्रय पंजिका और बोरा रजिस्टर की बारीकी से जांच की। हर एंट्री पर नजर डाली गई और पारदर्शिता को लेकर अधिकारियों से सीधे जवाब तलब किया गया। डिप्टी आरएमओ द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार अब तक 40 किसानों से 2828 कुंतल गेहूं खरीदा जा चुका है, जिसमें 38 किसानों का भुगतान उनके खातों में भेजा जा चुका है। हालांकि डीएम ने साफ किया कि आंकड़े ही नहीं, प्रक्रिया भी पूरी तरह पारदर्शी दिखनी चाहिए।
डीएम डॉ लाठर ने सबसे अहम निर्देश देते हुए कहा कि क्रय पंजिका में सभी किसानों के मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से दर्ज किए जाएं। उनका कहना था कि “किसान तक सीधी पहुंच ही पारदर्शिता की असली कसौटी है।” साथ ही उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि केंद्र पर आने वाले किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो न लाइन में देरी, न तौल में खेल।
निरीक्षण के दौरान डीएम ने खुद मौके पर गेहूं के नमूनों की नमी की जांच कराई और इलेक्ट्रॉनिक कांटे की शुद्धता परखी। यह कदम साफ संकेत देता है कि अब केवल कागजी रिपोर्ट नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर गुणवत्ता की जांच होगी। उन्होंने दो टूक कहा कि “गेहूं खरीद में किसी भी तरह की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
सूत्रों की मानें तो जिले में कई जगहों से खरीद केंद्रों पर अनियमितताओं की शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद डीएम ने यह औचक निरीक्षण कर सीधे संदेश दिया है कि अब सिस्टम पर पैनी नजर रखी जा रही है।
डीएम डॉ. अंकुर लाठर का यह एक्शन सिर्फ निरीक्षण नहीं, बल्कि प्रशासनिक चेतावनी है उन अधिकारियों के लिए जो किसान हितों से खिलवाड़ करते हैं। सवाल यह है कि क्या यह सख्ती जमीनी स्तर तक टिकेगी या कुछ दिनों बाद फिर वही ढर्रा लौट आएगा? फिलहाल, सातनपुर मंडी से निकला यह संदेश साफ है“किसान के हक में गड़बड़ी की अब कोई गुंजाइश नहीं।”


