– माफिया अनुपम दुबे के साथी साथी से जुडी रिपोर्ट से डीजीपी तक को किया गुमराह!
– रालोद के प्रदेश महासचिव राजीव रंजन ने उठाई आवाज
– कहा, “पुलिस प्रशासन एसपी और सरकार की छवि धूमिल कर रहा है”
फर्रुखाबाद। जनपद की कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल उठाते हुए राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के प्रदेश महासचिव राजीव रंजन ने खुलासा किया है कि जिले की पुलिस के कुछ अधिकारी कुख्यात वकील अवधेश मिश्रा को बचाने में सक्रिय हैं, जो माफिया अनुपम दुबे के साथी और आपराधिक गतिविधियों के संचालक के रूप में बदनाम है।
राजीव रंजन ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जिले के आला अधिकारी अपनी एसपी और सरकार की छवि को धूमिल करने में जुटे हैं। उन्होंने बताया कि क्षेत्राधिकारी मोहम्मदाबाद अजय वर्मा में अपनी 25 पेज की अपनी जांच रिपोर्ट में जानबूझकर ऐसे तथ्य दबा दिए हैं, जिनसे अवधेश मिश्रा की आपराधिक भूमिका स्पष्ट होती थी। यहां तक कि उन्होंने पुलिस महानिदेशक तक को भ्रमित कर दिया।”
सूत्रों के अनुसार, मामले में कई ठोस साक्ष्य और गवाहों के बयान अवधेश मिश्रा की संलिप्तता दर्शाते हैं, बावजूद इसके स्थानीय पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में उन्हें “क्लीन चिट” देने जैसा रवैया अपनाया है।
राजीव रंजन ने कहा, “पुलिस का यह रवैया साफ बताता है कि कुछ अधिकारी अपराधियों के संरक्षण में काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की शून्य सहनशीलता की नीति का मखौल उड़ाया जा रहा है। यह केवल एसपी की नहीं, पूरी सरकार की छवि को धूमिल करने की साजिश है।”
उन्होंने यह भी कहा कि रालोद पार्टी इस मामले को शासन स्तर तक उठाएगी और पुलिस महानिदेशक से निष्पक्ष जांच की मांग करेगी।
सूत्रों का कहना है कि इस पूरे प्रकरण में न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली, बल्कि रिपोर्टिंग सिस्टम की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
कई अधिकारियों ने ऑफ रिकॉर्ड स्वीकार किया है कि “रिपोर्ट तैयार करते समय ऊपर से दबाव था कि नाम न आने पाए।”
राजीव रंजन ने दो टूक कहा “हम अपराधियों का नहीं, कानून का शासन चाहते हैं। यदि डी जी पी स्तर से कार्रवाई नहीं हुई, तो हम कोर्ट जायेंगे।”
उधर यूथ इंडिया के संपादक शरद कटियार द्वारा की गई एक जांच में उनके द्वारा जनपद स्तर से जांच न करने की मांग ठुकराते हुए अपर पुलिस अधीक्षक संजय सिंह ने गठित एस आई टी की जांच में भी कुख्यात अपराधी को क्लीन चिट दे दी जो की संदेह को और प्रबल करती है शरद कटियार ने बताया कि मैं इस मामले में शासन में शिकायत करेंगे।
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