अमृतपुर पीएचसी में दो दिन से प्रभावित प्रसव सेवा, स्टाफ नर्स की तैनाती के आदेश; बाढ़ के बाद संक्रामक रोगों पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश
अमृतपुर
तहसील समाधान दिवस में फरियादियों की समस्याएं सुनने के बाद जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने शनिवार को स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए पीएचसी अमृतपुर और पीएचसी पिथनापुर का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कर्मचारियों की उपस्थिति, ओपीडी, दवाओं की उपलब्धता, जांच सुविधाओं और प्रसव सेवाओं की स्थिति परखी गई। पीएचसी अमृतपुर में फार्मासिस्ट के अनुपस्थित मिलने पर डीएम ने संबंधित के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। वहीं प्रसव सेवाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए स्टाफ नर्स की तैनाती के आदेश दिए गए।पीएचसी अमृतपुर में प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. गौरव वर्मा मौजूद मिले। अधिकारियों ने बताया कि केंद्र पर प्रतिदिन औसतन 200 से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। निरीक्षण के समय तक ही 130 से अधिक मरीजों को देखा जा चुका था। मरीजों की संख्या को देखते हुए डीएम ने ओपीडी व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने तथा मरीजों को समय से चिकित्सकीय परामर्श, जांच और उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।पीएचसी अमृतपुर की प्रसव सेवाओं की समीक्षा के दौरान बताया गया कि एक एएनएम मातृत्व अवकाश पर हैं, जबकि दूसरी एएनएम पदोन्नति के बाद छह माह के प्रशिक्षण पर हैं। इसके चलते पिछले दो दिनों से प्रसव सेवाएं प्रभावित हुई थीं। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम के निर्देश पर सीएमओ डॉ. आनंद उपाध्याय ने पीएचसी अमृतपुर में एक स्टाफ नर्स की तैनाती के आदेश दिए, ताकि क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए परेशानी न उठानी पड़े।निरीक्षण के दौरान डीएम और सीएमओ ने अस्पताल में मौजूद मरीजों से उनके स्वास्थ्य और उपचार के संबंध में जानकारी ली। अधिकारियों ने कर्मचारियों से क्षेत्र में फैल रही बीमारियों और मरीजों की संख्या के बारे में भी जानकारी प्राप्त की। उन्होंने बीमारी की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने और किसी भी असामान्य स्थिति की तत्काल सूचना देने के निर्देश दिए।पीएचसी में उपलब्ध सीबीसी समेत अन्य जांच मशीनों को सुचारु रूप से संचालित रखने के निर्देश दिए गए। डीएम ने कहा कि तकनीकी खराबी के कारण मरीजों को जांच के लिए बाहर न जाना पड़े, इसके लिए खराब उपकरणों को तत्काल दुरुस्त कराया जाए और उपलब्ध संसाधनों का पूरा उपयोग सुनिश्चित किया जाए।इसके बाद डीएम ने पीएचसी पिथनापुर का निरीक्षण किया। यहां प्रसव सेवाओं की जानकारी लेने पर बताया गया कि एएनएम अंजुम निशा द्वारा औसतन एक माह में 30 से अधिक प्रसव कराए जाते हैं। प्रसूताओं के स्वास्थ्य की जानकारी लेते हुए उपलब्ध जांच रिपोर्टों की भी समीक्षा की गई। डीएम ने गर्भवती और प्रसूता महिलाओं की नियमित निगरानी तथा मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी बनाए रखने के निर्देश दिए।पीएचसी पिथनापुर में कर्मचारियों की उपस्थिति, दवाओं की उपलब्धता, जांच सुविधाओं, साफ-सफाई और मरीजों को मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं का भी जायजा लिया गया। सीएचसी राजेपुर के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रमित राजपूत को क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी कर उन्हें बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए गए।
बाढ़ का पानी कम होने के बाद जलजनित और संक्रामक रोगों की आशंका को देखते हुए डीएम ने स्वास्थ्य विभाग को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वच्छ पेयजल और साफ-सफाई के प्रति ग्रामीणों को जागरूक करने, बीमारी के लक्षण मिलने पर तत्काल उपचार उपलब्ध कराने तथा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी बढ़ाने को कहा।डीएम ने सीएमओ और संबंधित चिकित्सा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को समय से उपचार और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों। कर्मचारियों की उपस्थिति में किसी भी प्रकार की लापरवाही सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। सीएमओ डॉ. आनंद उपाध्याय ने भी संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित कराने और स्वास्थ्य केंद्रों की नियमित निगरानी के निर्देश दिए।


