नई दिल्ली। ईवीएम के जरिए होने वाली मतगणना में टोटलाइजर प्रणाली लागू करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार से जवाब मांगा। अदालत ने केंद्र से विशेष हलफनामा दाखिल कर टोटलाइजर लागू करने में आने वाली कानूनी और व्यावहारिक अड़चनों की जानकारी देने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि यदि मतपत्रों की गिनती के संबंध में नियम 59ए जैसा प्रावधान मौजूद है, तो ईवीएम की मतगणना के लिए इसी तरह की व्यवस्था क्यों नहीं की जा सकती। टोटलाइजर में कई ईवीएम के वोटों को एक साथ जोड़कर गिना जाता है, जिससे किसी एक मतदान केंद्र का अलग-अलग मतदान रुझान सामने नहीं आता।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि सिद्धांत रूप में टोटलाइजर मतदाता की पसंद को गुमनाम रखने का अच्छा माध्यम है। वहीं, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मौजूदा बूथवार मतगणना से मिलने वाली पारदर्शिता और उसके संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठाए।
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि टोटलाइजर के जरिए कई ईवीएम के वोटों को एक साथ गिनने से यह पता लगाना मुश्किल होगा कि किसी विशेष बूथ पर किस उम्मीदवार को कितने वोट मिले। इससे मतदाताओं की गोपनीयता और चुनाव बाद संभावित दबाव या प्रताड़ना से सुरक्षा में मदद मिल सकती है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल टोटलाइजर लागू करने का कोई आदेश नहीं दिया है। अदालत अब केंद्र सरकार का पक्ष सामने आने के बाद मामले में आगे विचार करेगी।


