अफसर के फोन के बाद खुला वैक्सीन स्टोर का ताला, तब लगी जीवनरक्षक एंटी-रेबीज डोज; स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
कमालगंज, फर्रुखाबाद। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कमालगंज में रविवार को स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी लापरवाही सामने आई। पागल बंदर के काटने से घायल ग्रामीणों को जीवनरक्षक एंटी-रेबीज वैक्सीन के लिए घंटों भटकना पड़ा। अस्पताल कर्मियों ने पहले रविवार का हवाला देकर वैक्सीन लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन उच्चाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद आनन-फानन में स्टोर का ताला खुला और पीड़ितों को वैक्सीन लगाई गई।
जानकारी के अनुसार, रविवार को सबलपुर गांव में एक पागल बंदर ने कई लोगों पर हमला कर दिया। घायलों में महेश प्रताप सिंह और अभिषेक सिंह समेत अन्य ग्रामीण तत्काल सीएचसी कमालगंज पहुंचे। पीड़ितों का आरोप है कि अस्पताल में मौजूद कर्मचारी प्रदीप शुक्ला व उनके दो अन्य साथियों ने यह कहकर वैक्सीन लगाने से मना कर दिया कि रविवार होने के कारण स्टोर बंद है और उसकी चाबी अधिकारियों के पास है।
इसके बाद साथ आए प्रदीप कुमार सिंह ने अस्पताल परिसर में लगे सूचना बोर्ड से अधिकारियों के नंबर लेकर पूरे मामले की शिकायत की। शिकायत मिलते ही अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। कुछ ही देर में वैक्सीन स्टोर की चाबी उपलब्ध करा दी गई और सभी पीड़ितों को एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाया गया।
पीड़ित अभिषेक सिंह ने बताया कि अस्पताल में याकूतगंज का एक मरीज भी मौजूद था, जिसकी एंटी-रेबीज वैक्सीन की दूसरी डोज 19 जुलाई को लगनी थी। आरोप है कि कर्मचारियों ने उसे भी “आज नहीं, कल आना” कहकर वापस भेज दिया।
रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी में समय पर वैक्सीन लगना बेहद जरूरी होता है। ऐसे में रविवार का हवाला देकर मरीजों को लौटाना और वैक्सीन स्टोर बंद रखना स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर लापरवाही माना जा रहा है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्साधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही यह भी सवाल उठाया है कि यदि समय रहते अधिकारियों से संपर्क न किया जाता, तो इस लापरवाही की जिम्मेदारी कौन लेता?


