कानपुर
महिला आरक्षण बिल को लेकर जारी राजनीतिक विवाद अब सड़क से लेकर नेताओं के आवास तक पहुंच गया है। शनिवार को फतेहपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद नरेश उत्तम के कानपुर स्थित दामोदर नगर, बर्रा आवास पर हुए हंगामे के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।
सांसद ने इस घटना को लोकतंत्र पर हमला बताते हुए कहा कि उनके निजी आवास पर तोड़फोड़ और नारेबाजी की गई, जिससे लोकतांत्रिक मर्यादाएं कमजोर हुई हैं। उनका आरोप है कि यदि पुलिस समय पर रोकती, तो प्रदर्शनकारी उनके घर तक नहीं पहुंच पाते।
नरेश उत्तम ने आरोप लगाया कि यह पूरा घटनाक्रम एक सुनियोजित अराजकता का हिस्सा है और इसके पीछे सत्तारूढ़ दल से जुड़े लोगों का संरक्षण है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने उनके घर पर लगी महापुरुषों की तस्वीरों वाली होर्डिंग्स को फाड़ा और नेमप्लेट पर जूते-चप्पल फेंके।
घटना के दौरान उनकी पत्नी विजय लक्ष्मी उत्तम ने भी प्रदर्शनकारियों का विरोध किया। सांसद के अनुसार, उस समय वहां मौजूद लोगों ने नारेबाजी की और माहौल तनावपूर्ण हो गया, जिसके बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए भीड़ को हटाया।
सांसद ने बताया कि उन्हें इस घटना की जानकारी लोकसभा से लौटने के बाद मिली। बाद में उनके आवास पर बड़ी संख्या में समर्थक पहुंच गए, जिससे इलाके में राजनीतिक तनाव और बढ़ गया। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से संयम बनाए रखने की अपील की।
उन्होंने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे को संसद में उठाएंगे और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की मांग करेंगे। उनके अनुसार, महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए, लेकिन इसे राजनीतिक संघर्ष का रूप देना दुर्भाग्यपूर्ण है।
वहीं, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह मामला और गरमा गया है। सपा सांसद ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए इसे राजनीतिक नाटक करार दिया, जबकि विरोध प्रदर्शन करने वाली भाजपा महिला कार्यकर्ताओं की ओर से भी इस मामले में अलग रुख सामने आ रहा है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। यह घटना राज्य की राजनीति में एक नए टकराव के रूप में देखी जा रही है, जो आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है।


