– गरीबों की रसोई पर बढ़ेगा बोझ
नई दिल्ली/यूथ इंडिया। एक ओर केंद्र सरकार गरीब परिवारों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को बड़ा झटका दिया गया है। सरकार ने उज्ज्वला योजना के तहत सालाना सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की संख्या 9 से घटाकर मात्र 4 कर दी है। इस फैसले के बाद करोड़ों गरीब महिलाओं की रसोई का बजट प्रभावित होना तय माना जा रहा है।
उज्ज्वला योजना को वर्ष 2016 में बड़े अभियान के रूप में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य गरीब परिवारों, विशेषकर महिलाओं को धुएं से मुक्ति दिलाकर स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराना था। लेकिन लगातार बढ़ती गैस कीमतों के बीच अब सब्सिडी के दायरे को सीमित किए जाने से योजना के मूल उद्देश्य पर भी सवाल उठने लगे हैं।
नए नियमों के तहत अब उज्ज्वला लाभार्थियों को साल में केवल चार गैस सिलेंडरों पर ही अतिरिक्त सब्सिडी का लाभ मिलेगा। इसके बाद यदि परिवार को अधिक सिलेंडरों की आवश्यकता होती है तो उन्हें बाजार मूल्य पर गैस खरीदनी होगी। ग्रामीण क्षेत्रों और बड़े परिवारों के लिए यह निर्णय आर्थिक रूप से भारी पड़ सकता है, क्योंकि अधिकांश परिवारों की वार्षिक खपत चार सिलेंडरों से अधिक रहती है।
सरकार का तर्क है कि अधिकांश उज्ज्वला उपभोक्ता साल में चार से पांच सिलेंडर ही इस्तेमाल करते हैं, इसलिए सब्सिडी व्यवस्था को वास्तविक खपत के अनुरूप बनाया गया है। हालांकि जमीनी स्तर पर हालात कुछ अलग दिखाई देते हैं। कई राज्यों में लाभार्थी पहले से ही महंगी गैस के कारण नियमित रिफिल कराने में असमर्थ हैं और मजबूरी में लकड़ी, उपले तथा अन्य पारंपरिक ईंधनों का सहारा ले रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में भी इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष ने इसे गरीब विरोधी कदम बताते हुए सरकार पर चुनावी वादों से पीछे हटने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि महंगाई के इस दौर में गैस सब्सिडी कम करने के बजाय उसे और बढ़ाया जाना चाहिए था।


