– एक सीट पर 6 से ज्यादा दावेदार—शिक्षा व्यवस्था पर बढ़ा दबाव
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर एक बार फिर चर्चा में है। सर्वोदय विद्यालय में प्रवेश को लेकर इस बार जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। हालात यह हैं कि हर एक सीट पर 6 से ज्यादा छात्र दावेदारी कर रहे हैं, जिससे दाखिले की प्रक्रिया बेहद कठिन हो गई है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेशभर के सर्वोदय विद्यालयों में उपलब्ध 10,790 सीटों के लिए कुल 68,780 आवेदन प्राप्त हुए हैं। यानी मांग और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर साफ नजर आ रहा है। यह आंकड़ा खुद बता रहा है कि अभिभावकों का भरोसा अब तेजी से इन विद्यालयों की ओर बढ़ रहा है।
प्रदेश में इस समय कुल 103 सर्वोदय विद्यालय संचालित हैं, जो अपेक्षाकृत बेहतर शैक्षणिक गुणवत्ता और कम खर्च के कारण मध्यम वर्ग और ग्रामीण परिवारों के बीच पहली पसंद बनते जा रहे हैं। लेकिन सीटों की सीमित संख्या अब बड़ी चुनौती बनती दिख रही है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि
सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की मांग बढ़ी है
निजी स्कूलों की महंगी फीस से लोग परेशान हैं
प्रतियोगी माहौल के कारण अभिभावक बेहतर विकल्प तलाश रहे हैं
इसी वजह से सर्वोदय विद्यालयों की लोकप्रियता अचानक बढ़ी है।
लेकिन इस बढ़ती प्रतिस्पर्धा के साथ कई गंभीर सवाल भी उठ रहे हैं—
क्या सरकार इन विद्यालयों की संख्या बढ़ाएगी?
क्या हजारों योग्य छात्रों को सिर्फ सीटों की कमी के कारण बाहर होना पड़ेगा?
क्या चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होगी?
यदि आंकड़ों को देखें, तो लगभग 58 हजार से ज्यादा छात्र ऐसे होंगे जिन्हें दाखिला नहीं मिल पाएगा, जिससे शिक्षा के अधिकार और अवसर की समानता पर भी बहस तेज हो सकती है।
स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश में अब शिक्षा सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि संघर्ष बनती जा रही है—
जहां सरकारी स्कूलों में भी सीट पाना किसी प्रतियोगी परीक्षा से कम नहीं।
सर्वोदय स्कूलों में एडमिशन की होड़


