लखनऊ। लखनऊ सिटी ट्रांसपोर्ट के दुबग्गा डिपो में संविदा पर कार्यरत करीब 200 परिचालकों ने निजी कंपनी में स्थानांतरण के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया है। कर्मचारियों का आरोप है कि 5 साल तक सेवा देने के बाद अब उन्हें अचानक निजी कंपनी एसएस इंटरप्राइजेज में भेजा जा रहा है, जिससे उनकी नौकरी और भविष्य दोनों खतरे में पड़ गए हैं।
संविदाकर्मियों का कहना है कि उन्होंने महाकुंभ और राम मंदिर उद्घाटन जैसे बड़े आयोजनों में लगातार सेवाएं दीं, लेकिन अब उन्हें हटाकर निजी कंपनी के हवाले किया जा रहा है। कर्मचारियों के अनुसार, तीन महीने से वेतन भी नहीं मिला है और अधिकारियों से शिकायत करने पर उन्हें “काम करना है तो करो, नहीं तो बैग उठाओ और निकल जाओ” जैसा जवाब दिया गया।
कर्मचारियों ने बताया कि इस फैसले से उनके व्यक्तिगत जीवन पर भी गंभीर असर पड़ा है। एक परिचालक ने दावा किया कि नौकरी की अनिश्चितता के कारण उनकी तय शादी टूट गई। वहीं अन्य कर्मचारियों का कहना है कि 5 साल की मेहनत और सेवा के बाद अचानक निजीकरण का फैसला उन्हें सड़क पर लाने जैसा है।
फिलहाल लगभग 200 परिचालक दुबग्गा डिपो और इको गार्डन में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक संविदा व्यवस्था में सुरक्षा और स्थायी समाधान नहीं दिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं प्रशासन और विभागीय स्तर पर बातचीत और समाधान की कोशिशें जारी हैं।


