उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी देश का सबसे बड़ा राजनीतिक संगठन होने का दावा करती है। लगातार चुनावी सफलताओं ने पार्टी का जनाधार तो बढ़ाया है, लेकिन इसके साथ ही संगठन के भीतर स्थानीय स्तर पर गुटबाजी की चर्चाएं भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसे में लखनऊ में सांसदों और विधायकों की बैठक के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का बयान केवल एक सामान्य संगठनात्मक सलाह नहीं, बल्कि गुटबाजी पर नेतृत्व की स्पष्ट चिंता का संकेत माना जाना चाहिए।
नितिन नबीन ने अपने संबोधन में कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश के कई चुनावों में प्रभारी के रूप में काम किया है और देखा है कि चुनाव के दौरान कई बार एक गुट दूसरे गुट को कमजोर करने में लग जाता है। उनका यह कथन बताता है कि पार्टी नेतृत्व अब इस प्रवृत्ति को गंभीरता से देख रहा है। लोकतांत्रिक दलों में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन यदि वे चुनावी प्रदर्शन को प्रभावित करने लगें तो नेतृत्व का हस्तक्षेप आवश्यक हो जाता है।
उत्तर प्रदेश में भाजपा का संगठन गांव से लेकर प्रदेश स्तर तक फैला हुआ है। टिकट वितरण, स्थानीय नेतृत्व, संगठनात्मक पद और राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं कई बार कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच दूरी पैदा कर देती हैं। चुनाव के दौरान यही दूरी निष्क्रियता, असंतोष या भीतरघात के रूप में सामने आती है। भाजपा नेतृत्व अब इसी स्थिति को बदलने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है।
नितिन नबीन ने स्पष्ट कहा कि पार्टी की विचारधारा किसी भी व्यक्ति से बड़ी है। भाजपा जिसे भी उम्मीदवार बनाए, प्रत्येक कार्यकर्ता का दायित्व है कि वह पूरी निष्ठा से “कमल” के चुनाव चिह्न को जिताने के लिए कार्य करे। यह संदेश उन सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए है, जो व्यक्तिगत समीकरणों को संगठनात्मक हित से ऊपर रखने लगते हैं।
यह भी उल्लेखनीय है कि यह संदेश ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों की तैयारियां तेज हो रही हैं। भाजपा जानती है कि उसकी सबसे बड़ी ताकत बूथ स्तर तक फैला संगठन और समर्पित कार्यकर्ता हैं। यदि यही संगठन गुटों में बंटा दिखाई देगा तो विपक्ष को अवसर मिल सकता है। इसलिए शीर्ष नेतृत्व समय रहते संगठन को एकजुट करने में जुटा है।
भाजपा की राजनीतिक यात्रा बताती है कि अनुशासन और सामूहिक नेतृत्व उसकी पहचान रहे हैं। यही कारण है कि पार्टी समय-समय पर संगठनात्मक बैठकों के माध्यम से कार्यकर्ताओं को यह याद दिलाती रही है कि चुनाव व्यक्ति नहीं, संगठन लड़ता है। नितिन नबीन का वक्तव्य भी इसी सोच का विस्तार है।
अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या यह संदेश केवल बैठक तक सीमित रहेगा या वास्तव में बूथ स्तर तक पहुंचेगा। यदि स्थानीय स्तर पर संवाद बढ़ता है, असंतोष कम होता है और कार्यकर्ता व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर संगठन के लिए काम करते हैं, तो भाजपा की चुनावी ताकत और मजबूत होगी। लेकिन यदि गुटबाजी की प्रवृत्ति पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो सका, तो उसका असर चुनावी परिणामों पर भी दिखाई दे सकता है।
स्पष्ट है कि भाजपा नेतृत्व ने उत्तर प्रदेश में हावी होती गुटबाजी को समय रहते पहचान लिया है। नितिन नबीन का संदेश इसी दिशा में संगठन को एकजुट करने की गंभीर कवायद का हिस्सा माना जाना चाहिए। आने वाले महीनों में यह साफ हो जाएगा कि यह कवायद केवल संदेश तक सीमित रहती है या संगठन की कार्यशैली में भी इसका असर दिखाई देता है।


