लखनऊ। राजधानी की समिट बिल्डिंग में संचालित एक कथित कॉल सेंटर पर पुलिस की छापेमारी में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि यहां से अमेरिका के नागरिकों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की ठगी की जा रही थी। पुलिस ने मौके से कई लोगों को हिरासत में लिया है और पूरे गिरोह की गहन जांच शुरू कर दी है।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, कॉल सेंटर पूरी तरह कॉरपोरेट ऑफिस की तर्ज पर संचालित किया जा रहा था। कर्मचारियों के लिए अलग-अलग शिफ्ट, लक्ष्य (टारगेट), प्रशिक्षण और प्रदर्शन के आधार पर प्रोत्साहन (इंसेंटिव) की व्यवस्था थी। आरोप है कि कॉल सेंटर के एजेंट खुद को अमेरिकी सरकारी एजेंसियों या तकनीकी सहायता विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते थे और फिर उनसे मोटी रकम वसूलते थे।
पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क से जुड़े कई आरोपी 10वीं और 12वीं तक शिक्षित हैं, लेकिन उन्हें विदेशी नागरिकों को निशाना बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया था। अत्याधुनिक कंप्यूटर, इंटरनेट और संचार तकनीक का इस्तेमाल कर विदेशों में बैठे लोगों को अपना शिकार बनाया जाता था।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन, डिजिटल उपकरण और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज कब्जे में लिए हैं। बरामद इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है, ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच कई पहलुओं पर की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि गिरोह का संचालन कौन कर रहा था, इसके तार किन देशों तक जुड़े हैं और ठगी से अर्जित धनराशि का इस्तेमाल कहां किया जा रहा था। मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।


