डॉ विजय गर्ग
भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में से एक है। हर वर्ष लाखों छात्र स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई पूरी करके रोजगार और करियर की दुनिया में प्रवेश करते हैं। लेकिन शिक्षा और रोजगार के बीच मौजूद अंतर आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। कई छात्र अच्छे अंक प्राप्त करने के बावजूद अपनी रुचियों, क्षमताओं और नौकरी बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप सही दिशा नहीं चुन पाते। इसलिए भारतीय छात्रों को स्कूल से करियर तक की यात्रा में उचित मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान करना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
आज के दौर में केवल शैक्षणिक उपलब्धियां ही सफलता की गारंटी नहीं हैं। उद्योग जगत ऐसे युवाओं की तलाश में है जिनके पास संचार कौशल, समस्या-समाधान की क्षमता, टीमवर्क, नेतृत्व, रचनात्मक सोच और डिजिटल दक्षता जैसे गुण भी हों। दुर्भाग्य से, हमारी शिक्षा व्यवस्था अभी भी काफी हद तक परीक्षा और अंकों पर केंद्रित है, जिसके कारण छात्रों को वास्तविक कार्यस्थल की चुनौतियों के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं किया जा पाता।
करियर मार्गदर्शन की कमी भी एक गंभीर समस्या है। ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों के अनेक छात्र करियर के विभिन्न विकल्पों से परिचित नहीं हो पाते। वे अक्सर डॉक्टर, इंजीनियर या सरकारी नौकरी जैसे पारंपरिक पेशों तक ही अपने सपनों को सीमित कर लेते हैं, जबकि आज डेटा साइंस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, डिजिटल मार्केटिंग, पर्यावरण विज्ञान, खेल प्रबंधन, डिजाइन और उद्यमिता जैसे अनेक नए क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहे हैं।
इस स्थिति को सुधारने के लिए स्कूल स्तर पर ही करियर परामर्श को मजबूत बनाना आवश्यक है। छात्रों को उनकी रुचियों, योग्यता और व्यक्तित्व के आधार पर विभिन्न करियर विकल्पों की जानकारी दी जानी चाहिए। इसके साथ ही, अभिभावकों को भी इस प्रक्रिया में शामिल करना चाहिए ताकि वे अपने बच्चों की वास्तविक क्षमताओं को समझ सकें और उन पर अनावश्यक दबाव न डालें।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने भी कौशल-आधारित शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया है। यदि स्कूलों में इंटर्नशिप, परियोजना-आधारित शिक्षा, उद्योग भ्रमण और स्थानीय व्यवसायों के साथ सहयोग बढ़ाया जाए, तो छात्रों को कार्यस्थल का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो सकता है। इससे वे अपने भविष्य के करियर को लेकर अधिक स्पष्ट और आत्मविश्वासी बन सकेंगे।
डिजिटल तकनीक भी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। ऑनलाइन पाठ्यक्रम, कौशल विकास मंच और वर्चुअल इंटर्नशिप छात्रों को नए अवसरों से जोड़ रहे हैं। हालांकि, इसके लिए यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि सभी छात्रों को इंटरनेट और डिजिटल संसाधनों तक समान पहुंच प्राप्त हो।
स्कूल से करियर तक की यात्रा केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जीवन के लिए आवश्यक कौशल, आत्मविश्वास और सही दिशा प्राप्त करने की प्रक्रिया भी है। जब शिक्षा संस्थान, उद्योग, सरकार और परिवार मिलकर कार्य करेंगे, तभी युवाओं को उनकी क्षमता के अनुरूप अवसर मिल सकेंगे। भारत का उज्ज्वल भविष्य इसी पर निर्भर करता है कि हम अपने छात्रों को केवल परीक्षा में सफल होने के लिए नहीं, बल्कि जीवन और करियर में सफल होने के लिए कितनी अच्छी तरह तैयार करते हैं।
डॉ विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब


