अमित शाह का बड़ा एक्शन, पांच साल के भूमि रिकॉर्ड की होगी जांच
नई दिल्ली
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारत-बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। त्रिपुरा के सालबागान क्षेत्र में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उन्होंने सीमावर्ती इलाकों में भूमि खरीद-बिक्री, बड़े निर्माण कार्यों, आर्थिक लेनदेन, नकली मुद्रा और नशीले पदार्थों की तस्करी पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए। साथ ही पिछले पांच वर्षों के भूमि अभिलेखों की गहन जांच कराने का आदेश भी दिया गया है।
बैठक में गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि सीमा सुरक्षा केवल सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि जिला प्रशासन, पुलिस, राजस्व विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी इसमें सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उन्होंने सीमा क्षेत्र में एक अभेद्य सुरक्षा तंत्र विकसित करने पर जोर दिया, जिससे घुसपैठ, तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
सरकार ने सीमा सुरक्षा के लिए “संपूर्ण क्षेत्रीय रक्षा” मॉडल लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत केवल सीमा पर बाड़ लगाने तक सीमित न रहकर पूरे सीमावर्ती क्षेत्र को सुरक्षा कवच में शामिल किया जाएगा। सीमा से लगे गांवों के लोगों को भी जागरूक किया जाएगा तथा हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी की पहचान व रोकथाम के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे।
तकनीकी निगरानी को मजबूत बनाने के लिए अत्याधुनिक सीसीटीवी नेटवर्क स्थापित किया जाएगा। बीएसएफ के पुराने कैमरों को उन्नत कर जिला प्रशासन की निगरानी प्रणाली से जोड़ा जाएगा, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल संबंधित एजेंसियों तक पहुंच सके।
गृह मंत्री ने निर्देश दिए कि सीमा क्षेत्र में होने वाले बड़े निर्माण कार्यों, भूमि सौदों और संदिग्ध आर्थिक गतिविधियों की नियमित जांच की जाए। नकली मुद्रा और अवैध वित्तीय लेनदेन पर भी विशेष नजर रखी जाएगी। केंद्र और राज्य सरकार की सभी एजेंसियां मिलकर इस अभियान को आगे बढ़ाएंगी, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा और अधिक मजबूत हो सके।
इस पहल को भारत-बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ, तस्करी और संगठित अपराध के खिलाफ केंद्र सरकार की बड़ी रणनीतिक कार्रवाई माना जा रहा है।


