नई दिल्ली। संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार टकराव देखने को मिला। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के बीच तीखी बहस ने सदन का माहौल गर्म कर दिया। चर्चा के केंद्र में महिला आरक्षण में पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए अलग कोटा और जाति आधारित जनगणना का मुद्दा रहा।
बहस के दौरान समाजवादी पार्टी की ओर से महिला आरक्षण में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की महिलाओं के लिए पृथक आरक्षण की मांग उठाई गई। सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 और परिसीमन विधेयक 2026 का विरोध करते हुए कहा कि बिना सामाजिक न्याय सुनिश्चित किए महिला आरक्षण अधूरा रहेगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि पिछड़े वर्ग की महिलाओं को विशेष रूप से प्रतिनिधित्व देने के लिए अलग प्रावधान किया जाए।
वहीं, अमित शाह ने सरकार का पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि जाति आधारित जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसे पारदर्शिता के साथ पूरा किया जाएगा। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना संविधान के खिलाफ है। शाह के इस बयान पर अखिलेश यादव ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और सामाजिक न्याय के मुद्दे को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।
बहस के दौरान अमित शाह ने तंज कसते हुए कहा कि यदि समाजवादी पार्टी चाहती है तो वह अपने सभी टिकट मुस्लिम समुदाय को दे सकती है, इससे उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। इस बयान के बाद सदन में हंगामा और बढ़ गया और दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे अहम मुद्दों पर इस तरह की तीखी बहस आने वाले चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक दलों की रणनीति को भी दर्शाती है। यह मुद्दा अब सिर्फ संसद तक सीमित नहीं रहकर देश की राजनीति में बड़ा विमर्श बनता जा रहा है, जिसका असर आगामी चुनावों पर भी देखने को मिल सकता है।
सपा सारी टिकटें मुस्लिमों को दे दे, हमें क्या : अमित शाह


