लखनऊ
प्रदेश में निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत इस वर्ष प्रवेश प्रक्रिया ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। सत्र 2026-27 के लिए अब तक 1.43 लाख से अधिक आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों का निजी स्कूलों में दाखिला कराया जा चुका है, जो पिछले चार वर्षों में सबसे अधिक है। कुल 1.95 लाख सीटों के मुकाबले यह आंकड़ा उल्लेखनीय प्रगति को दर्शाता है।
इस सफलता के पीछे बेसिक शिक्षा विभाग की सख्ती और नियमित समीक्षा को मुख्य कारण माना जा रहा है। पिछले वर्ष जहां 1.40 लाख बच्चों को प्रवेश मिला था, वहीं इस बार यह संख्या उससे भी आगे निकल गई है। इससे स्पष्ट है कि इस बार प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाया गया।
प्रवेश प्रक्रिया को इस बार तीन चरणों में सीमित रखा गया, जिससे कार्य में तेजी आई। साथ ही अधिकारियों के साथ लगातार बैठकें कर हर स्तर पर प्रगति की निगरानी की गई। इससे यह सुनिश्चित किया गया कि आवंटित सीटों पर अधिकतम बच्चों को समय पर प्रवेश मिल सके।
पार्थ सारथी सेन शर्मा, जो अपर मुख्य सचिव हैं, ने जिलास्तरीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि प्रत्येक आवंटित बच्चे का प्रवेश हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। वहीं डॉ. मुकेश कुमार सिंह के अनुसार, शेष बच्चों के दाखिले की प्रक्रिया भी तेजी से जारी है।
सरकार का लक्ष्य है कि सभी पात्र बच्चों को शिक्षा का अधिकार मिल सके और कोई भी बच्चा आर्थिक कारणों से शिक्षा से वंचित न रहे। इसके लिए प्रशासन लगातार प्रयासरत है और आने वाले समय में शत-प्रतिशत प्रवेश सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।


