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Tuesday, August 18, 2026

मुजफ्फरनगर में जज रवि कुमार दिवाकर की सुरक्षा में बदलाव पर सवाल, आरआई पर गंभीर आरोप

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मुजफ्फरनगर। ज्ञानवापी प्रकरण में अपने फैसले को लेकर देशभर में चर्चा में आए फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव को लेकर अधिकारियों को पत्र लिखा है। सुरक्षा घटाए जाने को लेकर न्यायाधीश ने चिंता जताते हुए बिना उनकी अनुमति सुरक्षाकर्मियों को बदले जाने पर सवाल उठाए हैं।
न्यायाधीश की सुरक्षा पहले से संवेदनशील रही है। ज्ञानवापी प्रकरण में आदेश के बाद उन्हें धमकियां मिलने की बात सामने आई थी और वर्ष 2022 से हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। मुजफ्फरनगर में नवंबर 2025 में कार्यभार ग्रहण करने के बाद उनकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं।
न्यायाधीश ने अपने पत्र में सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरआई उदल सिंह द्वारा बिना अनुमति सुरक्षाकर्मियों में बदलाव किया गया। साथ ही सिपाहियों की ड्यूटी लगाने में कथित तौर पर पैसे लिए जाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, इसलिए मामले में पुलिस अथवा संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
जज की सुरक्षा में बदलाव का मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ महीनों में न्यायाधीश ने हत्या के कई मामलों में बेहद कठोर फैसले सुनाए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, 6 अप्रैल से 6 जुलाई 2026 के बीच छह हत्या के मामलों में 13 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया गया। इससे पहले 80 दिनों में नौ दोषियों को फांसी की सजा सुनाने की भी रिपोर्ट सामने आई थी।
जून 2026 में भी न्यायाधीश ने अपनी आवासीय सुरक्षा बढ़ाने की मांग की थी। उन्होंने बताया था कि बरेली में तैनाती के दौरान उन्हें दो पीएसओ के साथ आवासीय गारद मिलती थी, जबकि मुजफ्फरनगर में उन्हें केवल दो पीएसओ उपलब्ध कराए गए थे। पुलिस की ओर से उस समय कहा गया था कि गार्ड और गनर उपलब्ध कराए जा चुके हैं।
अब सुरक्षाकर्मियों को बदलने और ड्यूटी लगाने में कथित लेनदेन के आरोपों से मामला और गंभीर हो गया है। धमकियों का सामना कर रहे न्यायिक अधिकारी की सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी बदलाव की पारदर्शी समीक्षा और लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। इससे न केवल न्यायाधीश की व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और सुरक्षा व्यवस्था पर भी जनता का भरोसा कायम रहेगा।

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