रायबरेली में बड़ा खुलासा

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400 घुसपैठियों के परिवारों तक पहुंचा फर्जी जन्म प्रमाणपत्र का जाल, ATS की जांच में सामने आया बड़ा फर्जीवाड़ा

रायबरेली। जिले में घुसपैठियों को नागरिकता दिलाने की बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है। रायबरेली के कई गांवों में 400 से अधिक परिवारों तक फर्जी दस्तावेजों का नेटवर्क फैला पाया गया है। ATS की जांच में सामने आया कि वर्षों से बड़े स्तर पर फर्जी जन्म प्रमाणपत्र तैयार किए गए, जिनका इस्तेमाल कर घुसपैठियों और बाहरी लोगों को भारतीय नागरिकता दिलाने की कोशिश की गई।
जांच में सामने आए आंकड़ों ने प्रशासन को भी चौंका दिया—
अब तक 52,000 से अधिक फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाए गए थे।
जिन लोगों के नाम इन प्रमाणपत्रों पर थे, वे गांव में रहते ही नहीं थे।
कई परिवारों में 25 तक बच्चों के नाम प्रमाणपत्रों में दर्ज मिले।
4 बांग्लादेशी और 2 रोहिंग्या के लिए भी जन्म प्रमाणपत्र फर्जी तरीके से जारी किए गए।
ATS की प्राथमिक जांच के बाद प्रशासन अब तक 1,046 लोगों के फर्जी जन्म प्रमाणपत्र निरस्त कर चुका है। यह फर्जीवाड़ा मुख्य रूप से सलोन क्षेत्र के लगभग एक दर्जन गांवों में संचालित किया गया था।
इन गांवों में नाम जोड़ने, आयु बढ़ाने-घटाने और जन्म स्थान बदलने जैसे बदलावों के जरिए बड़ी संख्या में घुसपैठियों को भारतीय पहचान दिलाने की कोशिश की गई।
जांच एजेंसियों का मानना है कि इस फर्जी नेटवर्क में स्थानीय कर्मचारियों, दलालों और बाहरी समूहों की मिलीभगत हो सकती है। ATS और जिला प्रशासन अब पूरे गिरोह की पहचान कर रहा है और जल्द और भी नाम सामने आने की संभावना है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिसके भी दस्तावेज संदिग्ध पाए जाएंगे, उनका सत्यापन किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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