अयोध्या
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान राशि की कथित हेराफेरी को लेकर उठे विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। मामला प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचने के बाद इसकी गंभीरता और बढ़ गई है। भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह द्वारा प्रधानमंत्री को भेजे गए शिकायती पत्र के बाद मंदिर प्रशासन और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
इसी बीच राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री के पूर्व प्रमुख सचिव नृपेंद्र मिश्रा का अचानक अयोध्या दौरा चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने ट्रस्ट पदाधिकारियों और मंदिर से जुड़े अधिकारियों के साथ बंद कमरे में बैठक की। बैठक की कार्यसूची सार्वजनिक नहीं की गई, जिससे विभिन्न तरह की चर्चाओं को बल मिला है।विवाद के बीच संत समाज की ओर से भी निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है। महंत कमल नयन दास ने कहा कि यदि कहीं कोई गड़बड़ी हुई है तो उसकी पारदर्शी और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ रहे हैं, जिससे लोगों के मन में संदेह पैदा हो रहा है।सरयू तट स्थित करतलिया आश्रम के महंत बालयोगी रामदास ने भी पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में सच्चाई सामने आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि आरोप गलत हैं तो भी स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं के मन में पैदा हुआ भ्रम दूर हो सके।उधर, डॉ. रजनीश सिंह ने अपने पत्र में दान, चढ़ावे और मंदिर प्रशासन से जुड़े आरोपों की उच्चस्तरीय, समयबद्ध और पारदर्शी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप निराधार हैं तो जांच से यह स्पष्ट हो जाएगा और यदि कहीं अनियमितता हुई है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।


