लखनऊ
प्रदेश में बुधवार रात आई तेज आंधी और बारिश ने व्यापक तबाही मचा दी। बरेली, रायबरेली, शाहजहांपुर, इटावा, बाराबंकी, मथुरा, मैनपुरी, हरदोई, बदायूं और देवरिया समेत कई जिलों में बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। जगह-जगह बिजली के खंभे, ट्रांसफार्मर और पेड़ गिरने से लाखों लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
बरेली में सबसे ज्यादा असर देखने को मिला, जहां आठ बिजली उपकेंद्र ठप हो गए और 124 से अधिक बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त हो गए। करीब 150 पेड़ बिजली लाइनों पर गिरने से शहर का बड़ा हिस्सा रातभर अंधेरे में डूबा रहा। राजेंद्र नगर, इज्जतनगर, रामगंगानगर, महानगर और सनसिटी समेत कई इलाकों में सुबह तक बिजली बहाल नहीं हो सकी। बिजली गुल होने से पेयजल संकट भी खड़ा हो गया और लोगों के इन्वर्टर जवाब दे गए।
वहीं शाहजहांपुर में 350 बिजली के खंभे धराशायी हो गए, जबकि इटावा में 350 पोल और 207 पेड़ बिजली लाइनों पर गिरने से 500 से अधिक गांवों की आपूर्ति ठप हो गई। रायबरेली में 300 से ज्यादा पोल टूटने से 400 गांवों में अंधेरा छा गया। बाराबंकी में शहर सहित 300 से अधिक गांवों की बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई, जबकि एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार जिले के 950 गांवों तक बिजली आपूर्ति बाधित हो गई।
मथुरा में आंधी-बारिश से 95 बिजली खंभे टूट गए और आठ ट्रांसफार्मर फुंक गए। मैनपुरी में 97 पोल और 21 ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हुए। बदायूं में शहर में पांच घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 12 घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। हरदोई और देवरिया में भी बिजली लाइनों को भारी नुकसान पहुंचा और कई क्षेत्रों में लंबे समय तक अंधेरा पसरा रहा।
आंधी की रफ्तार इतनी तेज थी कि कई स्थानों पर विशालकाय पेड़ सड़क पर गिर गए, जिससे यातायात भी प्रभावित हुआ। बिजली निगम की टीमें रातभर मरम्मत कार्य में जुटी रहीं, लेकिन बड़े पैमाने पर हुए नुकसान के कारण कई जिलों में गुरुवार सुबह तक भी आपूर्ति पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी।
प्रदेशभर में आए इस मौसमीय कहर ने एक बार फिर बिजली व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। भीषण गर्मी के बीच बिजली और पानी संकट ने आम जनता की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। अधिकारियों का दावा है कि क्षतिग्रस्त लाइनों, ट्रांसफार्मरों और खंभों की मरम्मत कर जल्द से जल्द आपूर्ति बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है।


