अयोध्या।
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की जांच के बीच अब विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के केंद्रीय सह मंत्री गोपाल राव की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। चर्चा इस बात को लेकर है कि ट्रस्ट में किसी आधिकारिक पद पर न होने के बावजूद मंदिर प्रबंधन और विभिन्न महत्वपूर्ण निर्णयों में उनकी कथित भूमिका क्या रही।
जानकारी के अनुसार, गोपाल राव पूर्व में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रांत प्रचारक रह चुके हैं और वर्तमान में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय सह मंत्री हैं। सूत्रों के अनुसार, राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों और व्यवस्थाओं में उनका प्रभाव माना जाता रहा है।
चर्चा यह भी है कि राम मंदिर से जुड़े भूमि खरीद जैसे मामलों में भी उनकी भूमिका की बात सामने आती रही है। हालांकि ट्रस्ट की आधिकारिक संरचना में उनकी भूमिका स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि यदि वे ट्रस्ट के घोषित पदाधिकारी नहीं हैं, तो महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं और निर्णयों में उनकी भागीदारी किस आधार पर थी।
चढ़ावा प्रकरण की जांच के दौरान गोपाल राव का नाम भी प्रमुख चर्चाओं में शामिल है। हालांकि अब तक जांच एजेंसियों की ओर से उनकी भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है और न ही उनके विरुद्ध किसी कार्रवाई की घोषणा की गई है।
मामले की जांच जारी है। जांच एजेंसियों का कहना है कि सभी संबंधित तथ्यों, दस्तावेजों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही किसी भी व्यक्ति की जिम्मेदारी या संलिप्तता के संबंध में आधिकारिक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


